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Aman Shrivastava

Inspirational

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Aman Shrivastava

Inspirational

आजादी अभी अधूरी है।

आजादी अभी अधूरी है।

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गर भूख से कोई मरता है

पोषण के लिए तरसता है

हो कन्या भ्रूण की हत्यायें

डरती -सहमी हों अबलायें

हो राहजनी और लूटपाट

गुंडे -बदमाशों के हों ठाठ

ग्राहक को ठगते व्यापारी

हावी समाज पर व्यभिचारी

बच्चे करते हों मजदूरी

युवकों को घेरे अंगूरी

घर -घर में माल विदेशी हो

बेबस, बदहाल स्वदेशी हो

जहाँ भ्रष्टतंत्र, अधिकारी हों

हिंसा, हत्यायें जारी हों

शिक्षा, संस्कृति अनुरूप नहीं

सेहत की उजली धूप नहीं

सबको है अपनी फिक्र यहीं

भारत का कोई जिक्र नहीं

वो त्याग, समर्पण भाव नहीं

जीने मरने का चाव नहीं

इतना सब कुछ गर शेष अभी

तो मानो काम विशेष अभी

कैसे कहलायेगा स्वतंत्र

परतंत्र अभी है लोकतंत्र

शुभ आज़ादी से दूरी है

आज़ादी अभी अधूरी है। 


 


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