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Krutagna Pandya

Romance

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Krutagna Pandya

Romance

आज फिर

आज फिर

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200

आज फिर आई है रात चांद की,

आज फिर पड़ेगा काम उसका।


माफी, ए-दोस्त तुझको ईदी में क्या दूं?

मेरे पास तो जो भी है तमाम उसका।


इक बूढ़ा है मज़हब जिसका नाम है मोहब्बत,

ये दिल बनना चाहे इमाम उसका। 


मैं हर सुबह कहता हूं एक सुविचार,

मैं हर सुबह लेता हूं नाम उसका।


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