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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

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23 नंबर की पहेली

23 नंबर की पहेली

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प्रतिलिपि वाले भी कमाल करते हैं 

आधी रात को ही क्यों परेशान करते हैं 

टेढ़े मेढे टॉपिक से सबको छकाते रहते हैं 

लेखकों की कल्पनाशक्ति को बढ़ाते रहते हैं 


अब तक 99 का फेर सुना था 

कोई इससे पार नहीं पा सका था 

मगर आज प्रतिलिपि वालों ने सबको 

23 नंबर के फेर में ही उलझा रखा था 


सभी माथापच्ची कर रहे थे

कोई दो से तीन हो रहे थे 

तो कोई तीन दो पांच के बजाय 

दो और तीन पांच कर रहे थे।


23 नंबर की अबूझ पहेली में 

सब के सब "चित्त" हो रहे थे 

हम भी रात के बारह बजे जगकर 

23 नं की ताल पे ता ता थैया कर रहे थे।


किसी को जब कोई सिरा ना मिला 

कोई लकी या अनलकी नं ना मिला 

ना तो जूतों की साइज़ है इतनी होती 

और ना ही कोई बनियान की ऐसी होती। 


ना तो बीवी की 23 सहेलियां हैं 

ना 23 बच्चे करने की हिम्मत है 

शादी की उम्र भी 18 और 21 है 

फिर ये 23 नं की कैसी मुसीबत है।


फिल्मों में भी हीरो नंबर वन सुना था 

बीवी नंबर वन भी सामने आ गई थी 

आंटी नं 1 से लेकर कुली नं 1 भी देख ली 

जोड़ी नंबर वन भी 23 नं से घबरा गई थी।


विक्टोरिया नंबर 203 के 

राजा और राणा की तरह ही 

सब लोग 23 नं के पीछे पड़े थे 

इश्क, मोहब्बत, प्रेम को छोड़कर 

"अंकशास्त्र" जैसे नीरस विषय में 

सब के सब लेखक आकंठ गड़े थे।


जब कुछ समझ में हमारे नहीं आया 

तो हमने 23 नंबर को ऐसा किक लगाया 

कि वह सीधा "जहन्नुम" में जाकर रुका 

और फिर सब लेखकगणों को है चैन आया।




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