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ग़म से ख़ुशी की ओर
ग़म से ख़ुशी की ओर
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© Ravi Sharma

Inspirational

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ग़म से ख़ुशी की ओर                   

 जुदाई का ग़म उन्हें ही होता है, जिनको किसी के जाने का ग़म होता है| कहने का भाव जुदाई का गम उन्हें सबसे ज्यादा होता जिसका अपना कोई जिसे वो जी जान से प्यार करता है वो बिछड़ जाता है| ऐसा भी देखने को मिला है की जिनकी याद में, जुदाई के ग़म में हम अपनी ज़िंदगी व्यतीत कर रहे है उनको तो हमारी चिंता भी नहीं होती और वो कभी मुड़ के भी हमारी तरफ़ नहीं देखते| ऐसे प्यार करने को एक तरफ़ा प्यार कहते हैं|

 मैंने भी अपनी ज़िंंदगी में ऐसे प्यार करने वालो को देखा है| उनमें से एक है पंकज जो की एक लड़की से बहुत प्यार करता था जिसका नाम था सपना|  पंकज बचपन से ही उसको पसंद करता था| पंकज जिस रास्ते से अपने एक दोस्त अंकित के साथ स्कूल जाता था सपना का घर रास्ते में पड़ता था| वो रोज उसको जाते वक़्त देखता था | ऐसा करते करते उसको उस लड़की से प्यार हो गया जिसको सिर्फ़ वो दूर से देखता था| यह जाने बिना कि वो लड़की भी उसे चाहती है या नहीं| अब कई साल बीत चुके थे| एक दिन पंकज रोज़ की तरह स्कूल जा रहा था उसके मन में सपना को देखने की चाह वैसे ही बरकरार थी जैसे पिछले कई सालो से चल रहा था फिर अचानक जब वो सपना के घर के पास पहुँचता है तो क्या देखता है की इस बार वो दिखाई नहीं देती और उसके घर को ताला लगा हुआ था| पंकज अब हक्का-बक्का रह गया कि घर पर ताला क्यों लगा हुआ है| अब वो सपना को कैसे देखेगा वो आस पास से पूछता है और उससे पता चलता है कि वो यहाँ से घर छोड़ कर चले गए हैं और किसी को बता कर नहीं गए कि कहा जा रहे हैं| इस तरह पंकज का सपना जो सपना के साथ जिंदगी बिताने का था वो टूट जाता है|

 अब पंकज सपना की याद में स्कूल तो जाता है पर रास्ते में कभी भी फिर उसको सपना दिखाई नहीं देती| अब वो सपना की याद में अपनी पूरी ज़िंदगी बिताएगा ऐसा वो प्रण ले लेता है| अब पंकज पहले की तरह ख़ुश नहीं रहता था सपना के गम में हमेशा उदास रहता था जैसे की ज़िंदगी का अब कोई मकसद ही न रह गया हो | पंकज ने अपनी जिंदगी को जीना छोड़ दिया था| पंकज के दोस्त अंकित को सब कुछ पता था कि पंकज क्यों उदास है और अगर पंकज ज्यादा दिन ऐसे रहेगा तो वो ज्यादा देर तक जी नहीं पायेगा| अंकित जो की पंकज का दोस्त था इसलिए उसने अपने दोस्त को बचाने और उसकी ज़िंदगी में ख़ुशी लाने के लिए क़सम खाता है| अब वो रोज कुछ समय पंकज से मिलने को निकालता था और हमेशा पंकज को समझाता था की प्यार करना कोई गलत नहीं है और सपना से प्यार करके तूने कोई गलती नहीं की पर एक गलती तूने ज़रुर की कि सपना को इसके बारे में बताया नहीं | अगर बता देता तो शायद आज तुझे पता होता कि वो भी तुझसे प्यार करती थी कि नहीं | अगर करती होती तो तुझे आज पता होता के वो कहाँ है| मैं तेरे प्यार को गलत नहीं ठहराता पर यह तेरा प्यार एक तरफ़ा प्यार है ऐसा करने से न तो तुम्हे ख़ुशी मिलेगी और कहीं न कहीं सपना की ज़िंदगी भी खुशहाल नहीं होगी क्योंकि तुम उससे याद करते रहोगे और अनजाने में सही जब कोई किसी को दिल से याद करता रहता है तो कहीं न कहीं जिसे हम याद करते है वो भी बेचैन रहता है इस लिए कहीं न कहीं तू सपना को दुःख दे रहा है जो की तुम्हे नहीं करना चाहिए|

 यह बात अंकित बहुत प्यार से पंकज को समझाता है| अंकित की यह बात सुनकर पंकज एक दम उस की तरफ देखता है और बहुत ध्यान से सोचता है अंकित की यह बात उसके दिल में घर कर जाती है कि उसकी वजह से सपना को तकलीफ हो रही होगी| चाहे अनजाने में ही सही पर वो उसे दुःख दे रहा है| पंकज को बात समझ आ जाती है और वो अंकित को यक़ीन दिलाता है कि अबसे वो सपना को दिल में ज़रुर रखूँगा पर अपनी जिंदगी ख़ुशी-2 से जिऊँगा| यह सुन कर अंकित उसको गले से लगा लेता है और कहता है मेरी कोशिश काम आ गयी मेरा दोस्त वापिस मुझे मिल गया|

  इस कहानी में यह ही समझाया जा रहा है कि अगर आप किसी से प्यार करते हो तो उससे बोल दो मतलब इज़हार कर दो| उससे आपको पता चल जाएगा कि वो भी आपसे प्यार करता है या नहीं और अगर आपका कोई भी मित्र किसी तकलीफ़ में है तो उससे छोड़ने की बजाय उसे प्यार से समझाऐं| आपके इस तरह करने से अगर किसी एक को भी समझ आ जाए तो उसकी ज़िंदगी ग़म से ख़ुशी की ओर चली जाऐगी और जो ज़िंदगी उसे मिली है उसको वो ख़ुशी-ख़ुशी से जी पाऐगा|    

 

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