मूँगफली का वो आधा दाना

मूँगफली का वो आधा दाना

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पिछले २ महीनों से मेरी बेटी की खाँसी का सिलसिला चला ही जा रहा था। हर थोड़े-थोड़े दिनों में उसे खाँसी हो जाती। हम उसे डॉक्टर के पास लेकर जाते, डॉक्टर सर्दी-खासी की दवाई देते, उसे थोड़ा सा आराम मिलता लेकिन थोडे़ दिन बाद फिर वही सब शुरु हो जाता। उसकी साँसों मे हमेशा आवाज आती रहती। २६ जनवरी को उसका दूसरा जन्मदिन था। उसके बाद से उसकी तबियत ज्यादा खराब हो गयी। खाँसी के साथ-साथ बुखार और उल्टियाँ भी होने लगी। हम उसे फिर से डॉक्टर के पास लेकर गये, डॉक्टर ने चैक करकर कहा कि उसे निमोनिया हो गया है और उसे एंटिबायटिक दे दी। ६ दिन का कोर्स करने पर भी उसकी खाँसी में कोई आराम नहीं मिला।

बुखार और उल्टियाँ तो ठीक हो गयी पर साँसो में खखड़ाहट की आवाज आती रही। हम बहुत परेशान हो गये। हम उसे एक बार फिर से अपने कैम्पस में स्थित अस्पताल में लेकर गये। वहाँ हमें एक डॉक्टर मिले, उन्होंने मेरी बेटी को चैक किया और कहा कि इसकी स्थिति ठीक नहीं हैं। इसके एक फेफड़े में तो साँस सही तरह से जा रही है पर दूसरे में कोई समस्या लग रही है। हम बहुत घबरा गये।

चूँकि स्कोपी दूसरे दिन थी तो हमें १२ बजे रात के बाद उसे कुछ भी देने से मना कर दिया गया था। वो १२ घंटों मेरे जीवन के बहुत ही कष्टकारी थे क्योंकि भूख और प्यास से बेहाल मेरी बेटी बिल्कुल नहीं सोई और पूरी रात रोती रही। दूसरे दिन जब हम उसे ओ टी लेकर जा रहे थे तो बेहाल होकर दूध और पानी माँग रही थी। माँ-बाप के लिये अपने बच्चे को भूखा देखना सबसे ज्यादा दुखद होता है। मेरी आँखों से लगातार आँसू बहे जा रहे थे। ओ टी के बाहर जब हम पहुँचे तब एक डॉक्टर ने आकर मेरी बेटी को गोद में लिया, मुझे ऐसा लगा कि कुछ छूट रहा है। मैंने कभी उसको अपने आप से अलग नहीं किया आज तक। वो ऐसी फीलिंग्स थी जिसे शब्दों में बयाँ करना बहुत मुश्किल है, बस उसे एक माँ ही समझ सकती है। वो डॉक्टर फिर से मुझसे मिले, मैंने सिर्फ उनसे इतना ही कहा कि सर "आई ट्रस्ट यू" उन्होने मुझसे कहा कि मैम कुछ नहीं होगा। फिर भी कहते हैं ना कि माँ-बाप का दिल नहीं मानता। ऑपरेशन थियेटर के बाहर हम दोनों खडे़ रहे और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहे। करीब १ घंटे बाद वो डॉक्टर ओ टी के बाहर आये अपने हाथ में कुछ लिये हुए। अपने हाथ में एक छोटी सी पट्टी में वो, वो चीज लेकर आये थे जो फेफड़े में फँसी थी। वो मूँगफली का आधा दाना था। उस मूँगफली के आधे दाने ने मेरी बेटी को २ महीने से परेशान कर रखा था। ऑपरेशन के बाद मेरी बेटी को थोड़ी देर आई सी यू में रखा गया फिर प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। दो दिन उसे अस्पताल में ही अंडर ऑवजर्वेशन रखा गया फिर हम उसे घर ले आये।

ये घटना अभी कुछ दिन पहले ही घटित हुई। अपनी कहानी के माध्यम से बस इतना ही कहना चाहूँगी कि मूँगफली, मटर,चना, सेब के छिलकों इत्यादि चीजों से अपने बच्चों को दूर रखें। हर पल छोटे बच्चों पर नजर रखें।

डॉक्टर को भगवान का रूप कहते हैं। ऐसा क्यूँ कहते हैं मेरे जीवन में घटी इस घटना ने मुझे सिखाया। मैं तहे दिल से डॉक्टर और उनकी पूरी टीम का शुक्रिया अदा करती हूँ ।

भगवान पर हमेशा विश्वास बनायें रखें क्योंकि हमारा विश्वास ही हमें उनसे जोड़ता है।।


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