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Anjali Singh

Abstract

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Anjali Singh

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इश्क़ और समाज

इश्क़ और समाज

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क्यू तेरे इश्क़ मे बंजारा बने फिरता है, दिल 


ज़ब तक तुझे देख ना लूँ

तब तक तड़पता है, दिल 

ना समाज के बंदिशो की फिकर, 

ना बंधन है, दिखता रीति - रिवाजो का 


क्यूं तेरे इश्क़ मे बंजारा बने फिरता है, दिल 


बंदिशे बहोत है, तेरे इश्क़ मे 

फिर भी तुझे हर पल है, सोचता दिल 


बंजारा बने, हर गली बस 

तुझे ही तुझे ढूंढता है, दिल 


क्यूं तेरे इश्क़ मे बंजारा बने फिरता है, दिल।


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