देख ये धरती क्या कहती
देख ये धरती क्या कहती
हे कृष्ण दुलारे गोकुल प्यारे देख धरती क्या कहती
जंगल जलता नदियां मरती सब कुछ अब यह सहती ..
यदा यदा ही धर्मस्य का ज्ञान तूने बतलाया ।
असल धर्म क्या है बंशीधर किसी को समझ ना आया।।
यमुना में देखो रे कृष्णा नागराज फिर आया ,
यमुना क्या अब जगह जगह अपना साम्राज्य बिछाया ।।
नही रहा अब गरुड़ का भी डर वो भी अब कमज़ोर हुआ ।
काली घटाओं के अम्बर में मृत्यु का ही शोर हुआ ।।
गौ माता भी बेचारी अब यहां कहलाई जाती हैं ।
कूड़ा कचड़ा मल मूत्र अब सब सब ही खाए जाती हैं ।।
जंगल धमक धमक है जलता धुआं धुआं चहुँ ओर हुआ ।
जाने कितने दिनों से न सुबह हुई न भोर हुआ ।।
जय गोपाला जय नंदलाला , त्राहिमाम घनघोर हुआ ।
जंगल की लपटों में देखो मृत्यु का ही शोर हुआ ।।
जब जब धर्म अधर्म बना तो याद तुम्हारी आती है ।
फिर से जन्म लो बंसीधर , जान हमारी जाती है ।।
फिर से जनम लो नंदलाला जान हमारी जाती है ।।
फिर से जन्म लो गोपाला जान हमारी जाती है ।।
