STORYMIRROR

Sadhana Kapale

Tragedy

3  

Sadhana Kapale

Tragedy

विषय.. *खरेदी* शीर्षक:- *बाजार*

विषय.. *खरेदी* शीर्षक:- *बाजार*

1 min
331

देह विक्रीचा .... 

   येथेच भरतो, 

   बाजार सजतो, 

तो खरेदीचा //१// 


कातर वेळी... 

  दिवस संपता,  

  विक्रय मांडता, 

रंगते खेळी //२//

 

काय सांगावे ...  

  कसा खरिदार,  

  कोण ठेकेदार, 

कसे वर्णावी //३// 


गिऱ्हाईकांच्या ... 

  विकृत नजरा, 

  हातात गजरा,

 सजतो त्यांच्या //४// 


दारुड्या कुणी ....  

  शोधत फिरतो, 

  मस्तीत धुंदतो,

 काढत उणी //५// 


या खरेदीचा ...  

  अंदाज वेगळा, 

  आनंद आगळा, 

मिळे तृप्तीचा //६// 


बोली लागते ...  

  येथे यौवनाची,  

  खरेदी तनाची,

 येथे चालते //७// 


नारी गुलाम ....  

  जणू बाजारात,  

  या व्यवहारात, 

होते नीलाम //८// 


खरिददार...  

  खरेदी करतो,  

  भडास काढतो, 

होतो उदार //९// 

संवेदनांचा.... 

   फडशा पडतो, 

   बाजार संपतो,

 वारांगनांचा //१०// 


साहित्याला गुण द्या
लॉग इन

Similar marathi poem from Tragedy