तस्वीर
तस्वीर
तकदीर ने मेरी यूँ तस्वीर बनाई
मैं चुप खड़ा था पर बातें मेरी आंखें कर रही थी।
सामना करना था आने वाले कल का
पता नहीं क्यों मैं आज अभी से जूझ रहा था
तकदीर ने मेरी यूँ तस्वीर बनाई।
समा लिया था अपने आप में मैंने
पता नहीं क्यों कुछ तो पीछे ही छूट रहा था
तकदीर ने मेरी यू तस्वीर बनाई।
खुशियां बांटने वाला में
पता नहीं क्यों आज खामोशी में जी रहा था
तकदीर में मेरी यू तस्वीर बनाई!
मंजिलें खुद से बिछड़ के ही पाई जाती है
पता नहीं क्यों उन्हीं मंजिलों में मैं ही नजर नहीं आ रहा था
तकदीर ने मेरी यू तस्वीर बनाई।
तन्हाइयों के साथ जीना सीखा है मैंने
पता नहीं क्यों आज परछाई भी मुंह मोड़ रही थी
तकदीर ने मेरी यूँ तस्वीर बनाई।
मैं चुप खड़ा था पर बातें मेरी आंखें कर रही थी।
