Harsha Shende

Tragedy


3.5  

Harsha Shende

Tragedy


Sity : The Stray Dog

Sity : The Stray Dog

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ना बोल सकूं ना डाँट सकूं  

धुतकारे जाने पर बस चीख सकूं 

ढूंढती हूँ इन गलियों में दो वक्त की रोटी 

मिल जाए तो चैन से,

ना मिले तो भूखे पेट सोती 

राह के बंदे हैं राह पर चलते हैं 

फिर भी क्यों पत्थर खाने पड़ते हैं...? 

इंसानों की इस बस्ती में एक मिला साथी 

जिसने दिया है नाम 'सिटी'।


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