Neeru Sharma

Drama


4.4  

Neeru Sharma

Drama


सच्ची दोस्ती

सच्ची दोस्ती

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नैना कुछ पढ़ रही थी। अचानक दरवाजे की घंटी बजी। उसने दरवाजा खोला ।कौस्तुभ था। उसने मस्कुराते हुए स्वागत किया । कौस्तुभ बोला बिज़ी तो नहीं थी तुम । नैना हँसते हुए बोली क्यों बिज़ी होती तो तुम नहीं आते क्या? कौस्तुभ हँस दिया । बोला आता तो फिर भी । फिर कहने लगा घर पर बोर हो गया था । इतना सुनते ही नैना तुरंत बोली । अच्छा इसलिए आए वरना तो नहीं आते ।

कौस्तुभ थोड़ा गंभीर होकर बोला अरे ! नहीं भाई ऐसा नहीं है । पर कई बार सोच में पड़ जाता हँ कि जाऊँ या नहीं । नैना ने पहली बार उसे इतना गंभीर देखा था। पूछ बैठी ऐसा क्यों सोचते हो तुम कभी भी आ सकते हो।

कौस्तुभ बोला हाँ जानता हूँ पर कोई तुम्हें कुछ न कह दे इसलिए ध्यान रखना भी जरूरी है।

न जाने ये लोग इंसान को इंसान क्यों नहीं रहने देते। उस पर रिश्तों में बंधने का टैग क्यों लगाने में अपनी खुशी देखते हैं । नैना आज उसकी बातें सुनकर हैरान थी । क्या यह वही कौस्तुभ है जिसे हर बात बोलकर समझनी पड़ती थी । आज यह कितना गंभीर हो गया है।

कौस्तुभ फिर बोला नैना तुझे न जाने क्यों शादी से इतनी एलर्जी है। वह आगे कुछ कहे उससे पहले ही नैना तुरंत बोली और तुझे । दोनों खिलखिलाकर हँस दिए। फिर बोले दुनिया जाए तेल लेने हमारी दोस्ती सच्ची पक्की और अच्छी है। 


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