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Anjan Avara

Tragedy

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Anjan Avara

Tragedy

प्यार और अन्य भावनाएं

प्यार और अन्य भावनाएं

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जय एक सुलझा हुआ लड़का है, वो मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था और पढ़ाई में होशियार था वो जीवन में कुछ बनना चाहता था और इसलिए वो जीवन को जिम्मेदारी से जीता था, उसके जीवन में कुछ उसूल थे सच बोलूंगा, किसी को धोखा नहीं दूंगा, किसी को ऐसे सपने नहीं दिखाऊंगा जो पूरे ना कर सकूं, कभी किसी का दिल नहीं दुखाऊंगा, इन उसूलो के चलते वो कभी किसी लड़की को जब तक उसे भरोसा ना हो के उसे भी प्यार है तब तक वो कभी इजहार नही करता था उसे लगता है की ऐसा करने से वो उस लड़की से एक अच्छा दोस्त छीन लेगा, उसे स्कूल और कॉलेज में भी प्यार होता है पर वो जीवन में अभी कुछ हासिल नहीं कर पाया है तो कोई उससे शादी नही कर पायेगा तो वो किसी को अपना प्यार नही जताता, क्योंकि उसका उसूल था की अगर किसी को खुशी ना दो तो चलेगा पर किसी को दुखी नहीं करना चाहिए, उसे जो लड़किया पसंद भी करती थी वो उसकी इस भावना का सम्मान करती थी, इन्ही उसूलों पर जीवन बिताते वो अपनी पढ़ाई खत्म करता है और एक अच्छी नौकरी पाता है और अब वो अपने आप को प्यार करने की, शादी करने के काबिल समझता है और वो अपने लिए जीवनसाथी की तलाश करता है।

एक दिन उसे मैट्रिमोनियल साइट पर कविता का न्योता आता है वह उसे स्विकार करता है और वह बाते करना शुरू करते हैं और बातचीत से उसे पता चलता है कि कविता अनाथ है और उसने अपने पिताजी को सात महीने पहले ही खोया है और उनकी मां पहले ही स्वर्गवासी हो चुकी थी, जय को कविता के लिए बुरा लगता है वह उसका दर्द महसूस कर सकता था क्योंकि उसने भी अपने पिताजी को आठ साल पहले खोया था उसे संभालने के लिए उसका बाकी परिवार था पर कविता के पास उसके दोस्त के अलावा कोई नहीं था, उसे पता चलता है कि कविता ने अपने मां बाप की बीमारी में खूब सेवा की है और वो पढ़ाई में भी अव्व्ल है, जय को कविता के प्रति मान होता है कि जीवन की कठिनाई का सामना करते हुए भी यह लड़की अपने जीवन में सब सही करना चाहती है।, वह दोनो एक दूसरे से १००० km दूर रहते है और बातचीत आगे कैसे बढ़े इसलिए जय अपने परिवार को कविता के बारे मे बताता है और उनकी कविता से बातचीत करवाता है कविता जय की मां से बात करते समय रो पड़ती है, कविता का एक बुआ का लड़का ही उसकी शादी के लिए उसका साथ देने वाला था तो जय का परिवार उनसे बाते करता है।

अगले दिन कविता का जय पर कॉल आता है और वो माफी मांगते समय रो पड़ती है कि वह खूब संवेदनशील हो गई है अपने पिताजी के देहांत के बाद, जय समझ जाता है की कविता मना कर रही है फिरभी वह रो रही थी कॉल पर तो जेनीश ने कविता को शांत किया रोना सामान्य है संवेदनशील होना कोई बुरी बात नहीं है इंसान में दिल होगा तो संवेदना तो होगी ही ऐसी बाते करके उन्हे शांत किया और उनको जीने की वजह मिले इसलिए बताया कि उनके मां बाप उनके जरिए अब भी जीवित है वह खुश रह कर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दे सकती है, और जय कहता है कि उसे बुरा नहीं लगा हे उन्हो ने मना किया उसका कभी भी जरूरत हो तो बता देना उसपर कविता कहती है वह मना नही कर रही जय की कुछ गलतफेमी हुई है तो जय उसे अपने घर आने का न्योता देता है की वो आके उसका घर देखले और एकबार प्रत्यक्ष मुलाकात भी हो जाए।

वह तारीख पक्की करते है मिलने की ओर बातचीत करना जारी रखते है, वह एक दूसरे से बिल्कुल अलग विचारधारा रखते है कविता धार्मिक है और जय कर्म में विश्वास रखता है, कविता जैन डाइट रखती है और जय शाकाहारी हैं, कविता को हिंदी गीत पसंद है और जय सभी भाषा के गीत पसंद है, कविता बचपन से खूब घूमी है और जय की अभी शुरुआत है लेकिन एक बात जो सामान्य थी वो थी अपनो के लिए बुरे समय में साथ देना जय के लिए यह काफी था, जय अपने ऑफिस से भी कविता के साथ बात करता है इसलिए सबको पता है वह उसके शहर में आ रही हैं, ऐसे में वह दिन आ जाता है की जब कविता को ट्रेन में निकलना है पर वो नहीं निकलती, जब जय को पता चलता है कि कविता नही आ रही तो उसे कविता के लिए बुरा लगता है और अंदाजा लगाता है की उसका भाई उसको कितना डांटा होगा और वजह भी जाननी थी की वह क्यों नहीं आई तो कविता बीमार हो गई है ऐसा बताती है, बातचीत से पता चलता है कि सच में उसके भाई ने उसे डांटा है तो जय का मन करता है कि वो उसके भाई को डांटे पर वह ऐसा नहीं करता, वह कविता को बोलता है कि उसे अगर वो मना करेगी फिरभी बुरा नहीं लगेगा पर कविता बोलती है उसकी सच में तबियत बिगड़ी हुई है।, जय सोचता है की उसे डिप्रेशन की वजह से हिम्मत नहीं हो रही होगी और बीमार हो गई होंगी, वह सोचता है की मना कर दु क्या?, कविता विदाई पर घर तो छोड़ पाएगी ना?, कविता को अपने शहर बुलाकर वो उसे मानसिक तनाव तो नही दे रहा ना ?, क्या वो कविता को इतना प्यार दे पाएगा ना की वो अपने दोस्त, अपना शहर सब छोड़ कर भी खुश रहे ?,   

तब जय यह फैसला करता है कि वह अपने भावनाओं को रोकेगा नहीं और अगर उसे प्यार हुआ तो रुकेगा नहीं वह कविता से बात करना शुरू रखता है और तय करता है कि उसके किसी भी प्रश्न का उत्तर दूंगा उससे कोई बात नहीं छुपा लूंगा उसको सब सच बताऊंगा जैसा हूं वैसा ही पेश आऊंगा क्योंकि वह कविता को विश्वास दिलाना चाहता था और शादी के बाद उसकी कैसे व्यक्ति के साथ जीवन बीतेगा यह बताना चाहता है जय कविता के हर बचकाने सवाल का जवाब देता था उसको सोते जागते बस कविता को कैसे खुश रखा जाए वही विचार आते थे उसे जब लगता है कि कविता उदास है तो उसको हंसाने की कोशिश करता जब जरूरी लगता है तो उसके साथ रो लेता था उसके लिए गाने गाता था, ऐसे होता जा रहा था कि जय को कविता की खुशी में ही खुशी और उसके गम में गम महसूस होता था उसके सभी प्रयत्न कविता को खुश रखने के लिए होते थे जैसे कि कविता को खुश रखना ही उसका जीवन बन चुका था, कभी कभी बातों की गैर समझ में कविता को बुरा लग जाता तो जय को रोना आता था क्योंकि उसे लगता था कि उसने अपने सबसे प्यारा इंसान को दुखी किया है। बातो के इसी दौर में जय कविता को अपने नए घर में चीजे कैसी होगी सब बाते करता है और कहता है।

हम अपने कमरे मे उसके मां बाप की तस्वीर रखेंगे, क्योंकि अब यही घर उसका मायका और ससुराल है। जय सोचता है कविता को अपने घर से विदा होना है तो उसके शहर जा कर सब तैयारियां खुद करेगा जिससे कविता शादी को मना सके। इन्ही सब बातो के बीच जय अपने कुल देवता के मंदिर दर्शन के लिए जाता है और बस के उस सफर में उसकी कविता से बाते शुरू होती है, बाते कैसे कविता अपने पिता के साथ कार में घूमने जाती थी से शुरू हो कर कैसे वो शिक्षित बेरोजगार है, कैसे कविता को भूतकाल में एक लड़के से प्यार था मगर उस लड़के को सिर्फ मित्रता ही चाहिए थी, इन्ही सभी बातो मे जय को यह जान खुशी होती है की उसे कविता अपने राज बता सके उतना विश्वास कमाया है, तब जय कविता को भी अपने भूतकाल की ऐसी बात बताता है कि जिस बात पर उससे जलने वाले लोग उसे कमतर साबित करना चाहते है और कैसे वह इन सबसे संघर्ष करता है, जय यह बात अपना दिल हल्का करने और सहानुभूति पाने के इरादे से करता है, उसे लगता हे की कविता उसके इस संघर्ष को स्वीकार करेगी और उसे भरोसा दिलाएगी की वह कमतर नहीं है जैसे जय ने कविता को उसकी व्यथा पर उसे सहारा देने की कोशिश करी थी।

पर उससे उलट कविता उसे कमतर से भी नीचे बदतर साबित हो ऐसे प्रश्न उठाती है और आक्षेप लगाती है की आप झूठे हो आपने बाते छुपाई है, जब कविता ने अपने अतीत के बारे मे जय पर विश्वास होने के बाद बताया तो यही बात जय पर क्यों लागू नहीं होती। कविता के इन प्रश्नो को बे बुनियाद बताए भी तो क्यूं बताए जब उसने सहारा देने के बजाय झूठा ही साबित करना पसंद किया। उसे लगता है रात को देर हो चुकी है कल मंदिर दर्शन के बाद बाते करेंगे वह बता जय कॉल रख देता है। दूसरे दिन सुबह जय अपने कुलदेवता के दर्शन करते हुए प्राथना करता है की अगर कविता और वो एक दूसरे के लिए सही हो तो ही उनका रिश्ता हो, जय फिर कविता से बात करने की कोशिश करता है पर कॉल नही लगता और अगर लगता तो वह उठाती नही, जय अगल बगल के देवस्थानो के दर्शन कर दोपहर ४ बजे वापिस कुलदेवता के मंदिर आता और तभी कविता का कॉल आता है और वह अभी भी उन प्रश्नों का जवाब चाहती है जिसका जवाब जय के पास नही था उसे लगता है अब कविता मना ही करेगी, और अगर हां भी करे तो क्या जय कविता के इन विचारों के साथ उसके साथ सहजता से ग्रहस्ती निभा पाएगा और उसे अपने आप पर रोना आता है, वह मंदिर में ही दो घंटे रोता है, लोगो की भीड़ में अकेला अपनी बैग में मु छुपा वह बस रोता रहता है जैसे किसी मरे हुए का शौक मना रहा हो, वह मन में चिल्लाता है पर आवाज बाहर नहीं आती,

वह अपने आप को संभालते हुए अपनी वापसी की बस पकड़ता है। बस के सफर में जय सोचता है की कविता को उसकी कमियां क्यों दिखती है प्यार क्यूं नही, कविता को उसकी बात बताना झूठ क्यों लगती है उसकी हिम्मत क्यूं नहीं, प्यार के बदले सिर्फ स्वीकार भी क्यूं नही मिलता, वह मन बना लेता है की अगर कविता मना ही करना पसंद करेगी तो उससे कोई संपर्क नहीं रखेगा क्योंकि उसको डर लगता है की वो अपना आपा खो के कुछ भी बुरा न करदे और खुदकी नजरों में ना गिर जाए, जय दूसरे दिन सुबह अपने शहर पहुंचता है वो दिन उसके जीवन का महत्वपूर्ण दिन है उसके नए घर के कागजात पर हस्ताक्षर होने वाले हैं वह घर पहुंच नहा कर वकील के ऑफिस जा रहा होता है की कविता का कॉल आ जाता है की जो जय की मां उठाती है सब बातो से अनजान उन्हें कविता से बात कर कुछ ठीक नहीं लगता वो जय को जो की नहा कर बाहर आया है उसे पूछती है कविता को कुछ हुआ है वह ठीक तो हैना, जय फौरन कैलबैक करने के बजाय अपना काम खतम कर लेता है वकील के पास जा कर क्योंकि उसको पता था कविता से बात कर वो दिन भर कुछ नहीं कर पायेगा, वह अपना काम खतम कर कविता को कॉल करता है और कविता मना कर देती है और आरोप लगाती है कि जय ने उनसे झूठ बोला बाते छिपाई है, जय को इस बात का बुरा नहीं लगा के कविता को अब रिश्ता नहीं चाहिए पर कोई उसे झूठा कह जाए वह सहन नहीं कर पाया, जय कविता को बोलता है की उसकी भेजी हुई सभी तस्वीरे और उनकी चैट को मिटा दे क्योंकि उन चैट मैं जय ने अपना दिल खोल कर रख दिया था जिस पर अब कविता का कोई हक नही है और वो नही चाहता था की कविता उसे याद भी करे क्योंकि जय का प्यार तो सच्चा था वो कविता को भलाई चाहता था उसे लगता था की कविता अगर उसकी यादें संजोए रखेंगी तो वह जीवन में आगे नहीं बढ़ पाएंगी। 

जय कविता से बात करके घर आता है और अपने परिवार को सबकुछ बता देता है, जय की मां और बहनों की कविता पर दया और उसकी सोच पर तरस आता है, वो जय को डांटते है की उसने क्यों ऐसी बातें बताई और बिचारी को डराया और क्यूं उसे समझाया नहीं, और उन्हें गुस्सा भी आ रहा था कि कविता के डर की वजह से उनका भाई अब अपने आप को बदतर महसूस करेगा। जय को बहुत दुख होता है अपने आप पर गुस्सा और तरस आता है की क्यूं उसका प्यार पर्याप्त नहीं है, वह कविता को भूलना चाहता है इसलिए उसको सभी जगह ब्लॉक करना शुरू करता है, पर साथ में यह भी जानता है की कविता के लिए भी यह मुश्किल है उसे भी मना करके अच्छा नहीं लग रहा होगा इसलिए वह कविता से जो उसे दुख मिला इस रिश्ते से उसके लिए बार बार माफी भी मांगता है की कविता के लिए रिश्ते का कोई अंत मिले जिसमे उसे जिम्मेदार महसूस न हो रिश्ते के अंत के लिए।

जय अब कविता को कही हुई बाते, उसके साथ बीते पल याद करता रहता था, उससे उसकी जैसे नाम वाले लोगो से डर लगता है की यह लोग उसे कभी समझ नहीं पाएंगे, जो गाना उसके प्यार का प्रतीक हुआ करता था आज अब वो सुन भी नही पा रहा था, वो कविता को अपनी व्यथा कहता है की अब शायद वो उसे बोल दे की सब ठीक हो जाएगा कुछ वक्त की बात है पर नही कविता को उल्टा बुरा लगता है की जय को ऐसा क्यों लगा। जय को समझ आ गया की कविता को कभी उसका दर्द दिखा ही नही और जो प्यार उसने महसूस किया वह एक तरफा था। वह कविता से माफी मांग फिरसे बात नहीं करने का मन बनाता है।

अब दिन बीतते जा रहे थे जय कविता को भूलने की नाकाम कोशिशें करके थक चुका था,वह अब स्वीकार कर लेता है की वो कविता को कभी भूल नही पाएगा पर वह कविता की यादों में से दुखी क्षणों को याद नही करता, वो कविता को दिल से माफ करने में सफल होता है। जय अब नए रिश्ते के लिए लड़कियों से मुलाकात करता है पर वो किसी पर भी विश्वास करने से कतराता है तब जय को समझ में आता है कि उसका सच बताना भी कविता को धोखा क्यूं लगा, वह कविता को कॉल कर बोलता है की भले ही मेरे पर आप विश्वास मत करना, पर अगर जीवन में दूसरा कोई हमसफर मिले तो थोड़ा विश्वास करना सीखना और खूबसूरत जीवन को दूसरा मौका देना और नए हमसफर की दूसरे से तुलना मत करना, कविता भी जय को माफ कर आगे बढ़ जाने को बोलती है। जय को भले ही सुखद नहीं पर अपने जीवन की इस कहानी का अंत आखिर मिल ही जाता है।


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