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डॉ.निशा नंदिनी भारतीय

Inspirational

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डॉ.निशा नंदिनी भारतीय

Inspirational

प्रभु इच्छा सर्वोपरि

प्रभु इच्छा सर्वोपरि

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एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई, तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था।राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार करके उसका विवाह एक गरीब भिक्षु से करवा दिया। राजा ने सोचा कि एक भिक्षु ही राजकुमारी की भावनाओं की कद्र कर सकता है। विवाह के बाद राजकुमारी खुशी-खुशी भिक्षु की कुटिया में रहने आ गई।

कुटिया की सफाई करते समय राजकुमारी को एक बर्तन में दो सूखी रोटियां दिखाई दीं। उसने अपने भिक्षु पति से पूछा कि रोटियां यहां क्यों रखी हैं ?

भिक्षु ने जवाब दिया कि "ये रोटियां कल के लिए रखी हैं,अगर कल खाना नहीं मिला तो हम एक-एक रोटी खा लेंगे। "भिक्षु का ये जवाब सुनकर राजकुमारी हंस पड़ी। राजकुमारी ने कहा कि "मेरे पिता ने मेरा विवाह आपके साथ इसलिए किया था,क्योंकि उन्हें ये लगता है कि आप भी मेरी ही तरह वैरागी हैं। आप सिर्फ भक्ति करते हैं और कल की चिंता नहीं करते हैं।सच्चा भक्त वही है जो कल की चिंता नहीं करता और भगवान पर पूरा भरोसा करता है। अगले दिन की चिंता तो जानवर भी नहीं करते हैं। हम तो इंसान हैं,अगर भगवान चाहेगा तो हमें खाना मिल जाएगा और नहीं मिलेगा तो रातभर आनंद से प्रार्थना करेंगे।"

ये बातें सुनकर भिक्षु की आंखें खुल गई। उसे समझ आ गया कि उसकी पत्नी ही असली भिक्षु है।उसने राजकुमारी से कहा कि "आप तो राजा की बेटी हैं,राजमहल छोड़कर मेरी छोटी सी कुटिया में आई हैं,जबकि मैं तो पहले से ही एक भिक्षु हूं,फिर भी मुझे कल की चिंता सता रही थी। सिर्फ कहने से ही कोई भिक्षु नहीं होता। इसे जीवन में उतारना पड़ता है। आपने मुझे वैराग्य का महत्व समझा दिया। अगर हम भगवान की भक्ति करते हैं तो विश्वास भी होना चाहिए कि भगवान हर समय हमारे साथ है। भगवान् को हमारी चिंता हमसे ज्यादा रहती हैं। जब कभी आप बहुत परेशान हो, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा हो, तो आप आँखे बंद कर के विश्वास के साथ पुकारे... सच मानिये,थोड़ी देर में आप की समस्या का समाधान मिल जायेगा। प्रभु इच्छा सर्वोपरि होती है। कर्म कीजिए और प्रभु पर छोड़ दीजिए।"


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