मोती
मोती
एक दिन पता नहीं कहां से हमारे मोहल्ले में कहीं से सफेद रंग का एक मतवाला कुत्ता आ पहुंचा हम सबने उसका नाम मोती रख दिया था lमोती दिखने में जितना सुंदर उतना ही समझदार थाl उसके श्वेत शरीर ,चमकीली आंखें ,घुमावदार पूछ उसे अन्य गली के कुत्तों से अलग करती थी lमोती धीरे-धीरे सभी कुत्तों का सरदार बन गय l वह बहुत ही समझदार था उसमें नेतृत्व की भावना थी वह सारे मोहल्ले को अपना घर समझने लगl l स्वामी भक्ति और आत्मसम्मान उसमें कूट-कूट कर भरा था वह जमीन पर गिरी हुई रोटी कभी नहीं काटा था नहीं खाता थाl उसे हाथ से ही गरम-गरम खाना खिलाया जाता था वह भी बच्चों और मोहल्ले की दिन रात सेवा करता था l कोई चोर इस मोहल्ले की तरफ देख भी नहीं सकता थाl
धीरे-धीरे 7 वर्ष बीत गएl मोती अब बूढ़ा होने लगा , एक दिन ऐसा हुआ की सब को वह , भौंकने लगा और आते जाते लोगों की टांगों को पकड़ने लगा लोगों ने सोचा कि यह हमें काट रहा हैl सभी मोहल्ले वासी अब मोती से डरने लगे पर इंसान इतना खुदगर्ज होता हैl कि वह है जानवर की भावना को नहीं समझ पाता l किसी ने नहीं समझा कि यह वही कुत्ता है जो सबसे प्यार करता है , मोती को अब बीमारी हो चुकी थी इस बात का किसी को पता नहीं था lकोई भी अब उसके पास जाकर उसे खाना नहीं खिलता l सब डरते शायद वह उसे काट लेगा l एक दिन मोहल्ले वालों ने देखा की मोती रोज की तरह घूम कर आया है और खंबे के पास सो गया हैl पास जाने में पता चला की उसके प्राण पखेरू उड़ गए हैं अर्थात उसकी मृत्यु हो गई है lअब लोगों को पता चला की मृत्यु से पहले उसे, दिखाई देखना बंद हो गया था l वह लोगों को सूंघकर पहचान रहा था सारे मोहल्ले में सन्नाटा छा गया सभी मोहल्ले वासियों ने उसे अंतिम विदाई दी उसे सफेद कपड़े में लपेटकर फूल मालाओं के साथ अश्रुपुर विदाई दीl काश मोती यह सब देख पाता लेकिन वह हम सबसे बहुत दूर जा चुका था और उसका प्यार सबके जीवन पर एक अमित छाप छोड़ गया l
