लाल पत्थर
लाल पत्थर
पहाड़ियों के बीचो -बीच एक बहुत सुंदर गांव बसा था। उसी गांव में सिया नाम की एक लड़की रहती थी। वह बहुत गरीब थी पर उसे पढ़ने का बड़ा शौक था। उसकी माताजी ने उसका दाखिला एक सरकारी स्कूल में कराया वह बड़ी खुशी से वहां पढ़ने जाने लगी। एक दिन अचानक रास्ते में उसे एक चमकता हुआ लाल पत्थर मिला उसने उसे उठा लिया। उसे लगा कि यह पत्थर कुछ खास है ,मैं इससे क कुछ भी मांगूंगी वह पूरा होगा। इसी विश्वास के साथ उसने उस पत्थर से कहा की उसे कक्षा में सर्वप्रथम ला दे।
वह घर जाकर अधिक से अधिक मेहनत करने लगी और परीक्षा में बड़े अच्छे अंको से पास हुईl अब उसने सोचा क्यों ना मैं इस पत्थर से कहूं यह मेरा दाखिला कॉलेज में करवा दे। ऐसा ही हुआ मास्टर जी ने उसकी इच्छा का पूर्ण करने के लिए उसका दाखिला कॉलेज में करा दिया वह समझने लगी की यह सब लाल पत्थर की वजह से हो रहा है।
वह रोज उस पत्थर को धोती चमकाती थी और धीरे-धीरे उसकी पूजा भी करने लगीl यह सब उसकी सहेली ने भी देखा। उन्होंने सोचा वह भी ऐसा करें पर उनके साथ कोई चमत्कार ना हुआ। सिया लाल पत्थर से जो मांगती वह पूरा होता यह देखकर उसकी सहेलियों ने यह बात अपने उसकी माताजी से कहीं माताजी ने तब समझाया कोई वस्तु चमत्कारी नहीं होती यह तो व्यक्ति भी प्रबल इच्छा है जो उसे सपनों में साकार करती सपनों को साकार करने में सहायक होती है आप भी मेहनत करो अच्छी लगन से अपने सपने को पूरा करो तो आपकी इच्छा जरूर पूरी होगी। धीरे-धीरे समय बीता गया सिया की की पढ़ाई खत्म हुई और वह सरकारी नौकरी पर लग गई। पर वह सारा चमत्कार लाल पत्थर पत्थर का समझती थी।
