Divyanshu Mishra

Drama


5.0  

Divyanshu Mishra

Drama


मेरा दोस्त

मेरा दोस्त

3 mins 405 3 mins 405

शुशांत मेरे बचपन का दोस्त है। हम एक साथ एक ही स्कूल में पढ़े, एक साथ खेले और एक साथ बड़े हुए। हम दोनों की दोस्ती को देख कर हमारे अध्यापक हमे राम लखन बुलाते थे। हम दोनों के परिवार बहुत अलग थे। शुशांत के पापा सरकारी बाबू थे और मेरे पापा किसान थे। हमारे घर की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब थी। शुशांत गांव के ऊँचे कुल के ब्राम्हण परिवार का था और मैं छोटी जात का था। इन सब के बावजूद भी उसकी मम्मी मुझे बहुत मानती थी। इन गर्मियों की छुट्टी में शुशांत की मम्मी ने मुझे एक शर्ट खरीद कर दिया था। इस बात से शुशांत के पापा बहुत नाराज हुए थे।

वो मुझे बिलकुल भी पसंदनहीं करते थे और शुशांत को मुझसे दूर रखा करते थे।

"आज के दिन मौसम बहुत ही ख़राब है लग रहा जोरदार तूफ़ान आएगा" स्कूल जाते समय मम्मी की आवाज आई।

‌मैंं बोला ठीक है मम्मी मैं सावधानी से जाऊंगा। पूरे दिन जोरदार बारिश हुई। स्कूल की छुट्टी का समय हो चूका था पर अभी तक बारिश नहीं खत्म हुई थी। सबको घर जाने की जल्दी थी पर आसमान में छाये काले बादल देख कर किसी की हिम्मतनहीं हो रही थी। आखिरकार किसी तरह हम सब स्कूल से निकले। मैं और शुशांत एक साथ घर की ओर भागे जा रहे थे। हम दोनों को पता था कि घर पर माँ परेशान हो रही होंगी।

हर जगह पानी भर हुआ था। हमने सड़क का रास्ता छोड़ कर खेत का रास्ता पकड़ लिया। घर पहुचने का ये सबसे छोटा रास्ता था। खेतो में भी पानी भरा हुआ था। थोड़ी दूर चलने पे हमे सड़क की तरफ से एक आवाज आयी। मैं देखने को आगे बढ़ा तो शुशांत ने मुझे रोक दिया बोला घर जल्दी चलनहीं तो मम्मी डाटेंगी। मैंंने रुकने को बोला, मुझे ऐसे लगा जैसे किसी मोटर गाड़ी की लड़ने की आवाज आयी हो। मैं कुछ दूर आगे बढ़ कर देखा तो एक गड्ढे में एक गाड़ी पलटी हुई पड़ी थी। और एक आदमी उस गाड़ी के बगल पड़ा था। उसका आधा शरीर पानी में डूबा हुआ था। चेहरे और बालों पे बहुत सारा कींचड़ लगा हुआ था। दूर से देखने पर पहचान करना मुश्किल हो रहा था। मैंं शुशांत को बोला सरपंच जी लगते हैं। उसने बिना कुछ भी सोचे हुए हामी भर दी।

मैं बोला चल मदद करते हैं पर मुझे पता था कि उसका बिलकुल भी मननहीं है। वो मेरे पीछे पीछे आ रहा था और मैं खेत की मेड़ो पर भागे जा रहा था। वहां जा कर देखा तो वो आदमी कोई औरनहीं शुशांत के पापा थे। शुशांत देखते ही रोने लगा। उसके पापा बेहोश हो चुके थे। देखने से ऐसा लग रहा था कि पानी भरे हुए गड्ढे में स्कूटर का अगला पहिया चला गया था। हम दोनो ने बहुत कोशिश की उनको होश में लाने की पर होशनहीं आया।

उनके चेहरे और सिर पर लगे कींचड़ को धोने के बाद मैंंने देखा की उनके पेट से खून बह रहा है। अब हमें मदद की आवश्यकता थी। हम दोनों ने जोर जोर से चिल्लाना शुरू किया। पास के खेतों से कुछ लोग दौड़ कर आये हमारी मदद करने को। उनकी मदद से शुशांत के पापा को हम हॉस्पिटल ले जा सके। हॉस्पिटल पहुंचते ही उनको होश आया गया था। वो खुद को हॉस्पिटल में देख कर चौंक गये। मैंने उनके होश में आने के बाद शुशांत से बोला मैं घर जा रहा हूं मम्मी इंतजार कर रही होगी। शुशांत बोला मेरी शर्ट पहन कर घर जाओ नहीं तो ठण्ड लग जाएगी। मैं मना कर दिया और बिना शर्ट के ही घर की ओर चल पड़ा। शुशांत के पापा एक बार मुझे देख रहे थे एक बार खून से सनी हुई मेरी शर्ट को जो उनके पेट से बंधी हुई थी।


Rate this content
Log in

More hindi story from Divyanshu Mishra

Similar hindi story from Drama