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Sagar -दिल की बातें दिल से दिल तक

Inspirational

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Sagar -दिल की बातें दिल से दिल तक

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मैं और मेरा परिवार

मैं और मेरा परिवार

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मेरा परिवार संयुक्त परिवार है उसका मैं सबसे छोटे सदस्य हूं, अक्सर घर घर में भाई भाई की नहीं बनतीं,

लेकिन मेरी मेरे भाई से बहुत बनती है जिसका कारण है हम दोनों एक दूसरे को समझते हैं। मैंने अपने भाई की बात को कभी नहीं टाला। मेरी पत्नी भी भाई के आगे नहीं बोलती जिससे झगड़ा नहीं होता। मेरे लिए मेरा भाई एक पिता के समान है और भाभी एक मां के समान, दोनों ने हमेशा ही बड़े होने का फ़र्ज़ निभाया है।

अगर हम बड़ों को सम्मान देंगे दो घर में झगड़े कभी नहीं होंगे झगड़े सब घरों में होते हैं बस कभी भी एक बात को लेकर नहीं बैठना चाहिए। बातों को साथ बैठकर सुलझाना चाहिए। यही जीवन का सार है मैंने तो जीवन में यही सीखा है। छोटे हमेशा छोटे रहते हैं, वो कभी बड़े नहीं बन सकते। बचपन में हमेशा ये ही शिक्षा दी गई कि बड़ों का आदर करो। जब मैं छोटा था तो भाई से डरता था, सोचता था भाई कभी कुछ कह ना दे पर जब धीरे धीरे बड़ा होता गया समझ आती गई, मां बाप का भी बहुत बड़ा हाथ होता है बच्चों को आगे ले जाने में मेरे मां बाप ने जीवन में बहुत संघर्ष किया है, उनके संघर्ष को मैंने देखा है, हम सभी भाई बहनों ने घर में बहुत संघर्ष किया है, तभी आज हम एक दूसरे से जुड़े हैं, जहां पर बड़ों को सम्मान दिया जाएगा वहां घर स्वर्ग बन जाएगा, मैं तो कहता हूं कुछ नहीं रखा लड़ाई में सब यहीं रह जाना है, इसलिए हम सभी को बहुत ही प्यार से रहना चाहिए। घरों में अक्सर लड़ाई झगड़े सिर्फ संपत्ति को लेकर होते हैं, मैं कहता हूं थोड़ा सब्र करके चलना चाहिए, सब सही हो जाता है धीरे धीरे ।मेरे पापा घर में सबसे बड़े थे उन्होंने सब्र किया लेकिन वो परिवार को साथ लेकर चले और उनका साथ मेरे चाचा ने दिया जिनकी वजह से मैं आज इतना कुछ कह पाता हूं। मेरे हर कार्य में मेरे परिवार ने मेरा साथ दिया, और आज भी हम सब मिलकर रहते हैं, आज कोरॉना महामारी ने हमें बता दिया कि हम बिन परिवार के कुछ नहीं है, न जाने कितने लोगों चले गए , क्या कर सकते हैं सभी को यहीं रहना है मुझे बहुत दुख होता है जब कोई जाता है आज भी मैं रो पड़ता हूं जब पापा की याद आती है।

मेरे पापा ही ऐसे शख्स थे जो कभी किसी के आगे नहीं झुके और उन्होंने हमें भी यही शिक्षा दी हम सबको पढ़ाया लिखाया और इस काबिल बनाया के हम कुछ बन सकें और उनका नाम इस दुनिया में रोशन कर सकें। मैं भी उनकी बताई बातों पर ही चलता हूं। ये तो सच है के बड़े कभी गलत नहीं होते गलत तो हम ही होते हैं जो कभी कभी बहक जाते हैं और अपने रिश्ते को ख़तम कर देते हैं, मां बाप कभी गलत नहीं सिखाते हमारी संगत ही हमें ग़लत बनाती है और जब संगत ही सही होगी तो सब सही होगा। आज संयुक्त परिवार के टूटने की वजह ही गलत सोच है बड़ों का आदर न करना भाई का भाई से जुबां लड़ाना जिस घर में ये सब नहीं होता वहां कभी कुछ नहीं होता आज मेरे परिवार में अगर मेरा भाई मुझसे गलत भी बोलता है तो मै चुप सुन लेता हूं क्यों के वो मेरे परिवार का एक हिस्सा है और मैं छोटा हूं अगर उसने गुस्से में कुछ ग़लत कह भी दिया तो क्या हुआ आखिर भाई ही तो है, अगर ये बातें हम सबके मन में आ जाएं तो हम हमेशा घर में सुखी रहेंगे, बस आपको झगड़े का मुख्य कारण देखना है अगर आप उसको बार बार नहीं दोहराओगे तो घर में सुखी रहोगे। घर में सारी बातें बैठकर निबटा सकते हैं हम लोग तो हम झगड़े को बाहर तक क्यों ले जाएं इसलिए परिवार में हर समस्या को बैठकर ही साझा करे किसी बाहर वाले को इसमें शामिल न करें, घर में कोई भी कार्य करने से पूर्व सभी लोगों से पूछे उनके बारे में हमें जानकारी देनी चाहिए और उस कार्य को सबके समक्ष रखना चाहिए तभी बड़ों का सम्मान होता है। जहां छोटे अपनी चलाते हैं वहां बड़े इज्जत नहीं पाते हैं ।जिन घरों में बड़े छोटों को नहीं टोकते हैं वहां छोटे बिगड़ जाते हैं और वहां कोई कार्य नहीं हो सकता इसलिए जहां तक हो छोटों को समझा कर रखना चाहिए ताकि वो बड़ों को सम्मान दे सकें, हमेशा छोटे छोटे ही रहते हैं वो कभी बड़े नहीं बन सकते चाहे वो कितनी ही तरक्की कर लें जैसे मां बाप हमेशा मां बाप ही रहते हैं उनकी जगह कोई नहीं ले सकता, हमे हमेशा बड़ों को सुनना चाहिए और उन्हें सुनने की आदत डालनी चाहिए तभी हम तरक्की कर सकते हैं।

मेरा बस यही कहना है आप सभी परिवार को माने।



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