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Pratibha Mahi

Tragedy Inspirational


4.3  

Pratibha Mahi

Tragedy Inspirational


माँ मुझको बतलाओ ना

माँ मुझको बतलाओ ना

4 mins 414 4 mins 414

एक तीन चार साल का बच्चा जिसके पापा की मृत्यु हो जाती है। परिवार के सभी लोग उससे यह कह कर बहला देते हैं कि पापा भगवान के घर गए हैं।

कुछ दिन बाद जब ये बच्चा अपने दोस्त के साथ खेल रहा होता तो उसका दोस्त कहता है तेरे पापा कहाँ हैं अब तू उनके साथ नहीं आता। बच्चा कहता है वो भगवान के घर गए हैं जब आ जायेंगे तब आया करूँगा। तेरे पापा अब कभी नहीं आयेंगे, भगवान के घर से कोई वापस नहीं आता, मेरी उसके दादी भी नहीं आयी उनको तो कई साल हो गए। ये सुन कर बच्चा जोर जोर से रोता हुआ घर आया और अपनी माँ से बोला-- माँ मेरा दोस्त कह रहा है मेरा पापा अब कभी नहीं आयेंगे।

 माँ ने बेटे को गोद में बिठाया और प्यार से समझाया कि तुम्हारा दोस्त पागल है उसे कुछ नहीं पता। तुम्हारे पापा ज़रूर आयेंगे।


बेटा --माँ अभी बुलाओ मेरे पापा को ।

माँ---पापा भगवान के घर गए हैं भगवान को तुम्हारे पापा की जरूरत थी इसलिए भगवान ने बुलाया है।

बेटा-- मेरे ही पापा को क्यूँ बुलाया है और किसी को बुला लेते।

माँ-- आपके पापा डॉक्टर हैं ना। भगवान जी का डॉगी बीमार हो गया है उसे ठीक करने के लिए बुलाया है।

बेटा--- किसी और डॉक्टर को बुला लेते, मेरे ही पापा को क्यूँ बुलाया?

माँ -- आपके पापा दुनियाँ में सबसे अच्छे डॉक्टर हैं, भगवान को सबसे अच्छा डॉक्टर चाहिए था जो उनके डॉगी को ठीक कर दे।

इसलिए आपके पापा को बुलाया।

बेटा--फिर अब कब आयेंगे पापा ?

माँ -- जब भगवान का डॉगी ठीक हो जाएगा तब आ जायेंगे।

बेटा--- पक्का आ जाएंगे।

माँ -- हाँ पक्का आ जाएंगे।

इसी तरह समझाते समझाते तीन साल गुज़र गये । बच्चा 7-8 साल का हो गया। एक दिन TV देखने के बाद माँ के पास आया और मृत्यु के बारे में पूछने लगा। माँ ने सोचा ये सही समय है उसे उसके पिता की सच्चाई बताने का।

देखिए एक माँ अब किस तरह से बेटे को मृत्यु का कड़वा सच बताती है। एक कविता के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत है।


इक दिन बेटा बोला माँ से

बात मुझे समझाओ ना।

देखा था टी०वी० पर मैंने 

माँ मुझ को बतलाओ ना।


मृत्यु की सब करते बातें

मम्मी वो क्या होती है।

मरने पर क्यूँ सारी दुनियाँ

फुट फुट कर रोती है।


सीढ़ी के बिस्तर पर उनको

फिर क्यूँ बाँधा जाता है।

चार चार लोगों के हाथों

फिर उठवाया जाता है।


मरघट की सब करते बातें

मम्मी वो क्या होती है।

देखा था टी०वी० पर मैंने 

भीड़ इकट्ठी होती है।


ढेर लगा लकड़ी का उस पर

बिस्तर जाकर लगा दिया।

उनके ही बेटे ने उनको

फिर काहे माँ जला दिया


बोलो अब तुम कुछ तो बोलो

कुछ तो माँ समझाओ ना।

एक दिन बेटा बोला माँ से

माँ मुझको बतलाओ ना।


हाथ पकड़ फिर बोली मैया

बैठो तनिक हमारे पास।

समझाऊँगी लालन तुम को

जीवन के कुछ पल वो खास।


एक शक्ति है इस दुनिया में

जिसने हमें बनाया है।

ईश्वर उसको कहते हम तुम

जिसने खेल रचाया है।


हम सब हैं उसकी कठपुतली

जग का वो आधार है

रोज नचाये जो हम सबको

वो ही पालन हार है।


दुख सुख दो पहिए जीवन के

हर पल चलते रहते हैं

आज उजाला ख़ुशियों का कल

दुख के झरने बहते हैं


इतना तो में समझ गया माँ

अब आगे समझाओ ना।

फिर क्या होता है जीवन में

माँ मुझ को बतलाओ ना।


पाँच महा तत्वों को मथकर

अपना रूप गढ़ा उसने।

माटी के इस घट में अपना

दिल में अंश जड़ा उसने।


एक समय निश्चित कर भगवन

जग में हमें पठाता है।

जब जब वक्त करें हम पूरा 

अपने पास बुलाता है।


जिन जिन को वो पास बुलाता

उनको वापस जाना है।

जिन जिन को तुम देख रहे हो

सबको इक दिन जाना है।


नाना को भी जाना है क्या

नानी को भी जाना है।

मामा को भी मामी को भी 

मौसी को भी जाना है।


बोलो मम्मी कुछ तो बोलो

बात सभी समझाओ ना

कैसे क्या कुछ होता है फिर

माँ मुझको बतलाओ ना।


माँ बेटे से कहती है---हाँ बेटा मुझे भी भगवान के घर जाना है, नाना नानी , मामा मामी, मौसी सबको जाना है। 

बेटा बोला -- माँ मुझे भी जाना है

माँ कहती है-- हाँ आपको भी जाना है और आप इस दुनियाँ में जिस जिस को देख रहे हो सबको जाना है। 

बेटा पूछता है -- फिर क्या होता है ?फिर कोई वापस नहीं आता।

माँ कहती है--- नहीं ..! भगवान के घर से कोई वापस नहीं आता। फिर भगवान उसे नया जन्म देकर दुनियाँ में कहीं और भेज देते हैं।

बेटा थोड़ी देर कुछ सोचता है फिर कहता है-- माँ फिर अब पापा भी नहीं आयेंगे क्या? 

माँ कहती है-- हाँ अब आपके पापा भी कभी नहीं आयेंगे। अब आपके पापा को भगवान ने नया जन्म दे दिया होगा। अब वापस वो कहीं नन्हें से बच्चे के रूप में रह रहे होंगे। इतना सुन बेटा माँ को गले लगा लेता है और कहता है माँ आज से तुम ही मेरे पापा हो।



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