Click Here. Romance Combo up for Grabs to Read while it Rains!
Click Here. Romance Combo up for Grabs to Read while it Rains!

Sadhna Singh

Inspirational


4  

Sadhna Singh

Inspirational


लाल लहंगा

लाल लहंगा

7 mins 133 7 mins 133


आज सुमी बहुत दुखी थी, बड़ी कुड़न थी उसके मन में,.... उसका जी चाह रहा था कि अपने बाल नोच ले।... हद हो गई .....वह बुदबुदाई। फिर से उसने ललचाई नजरों से उस खूबसूरत लाल लहंगे की तरफ देखा...!.. लाल सिल्क का लहंगा... सुनहरे तारों की कढ़ाई... बीच-बीच में लाल और हरे टंके हुए मोती.... खूबसूरत लाल सिल्क का ब्लाउज.... जिस पर लहंगे से मिलती-जुलती कशीदाकारी ....बहुत ही सुंदर चुन्नी भी थी ,उसकी कशीदाकारी भी सुमी को अपनी ओर खींचे जा रही थी । सुमी का मन हो रहा था कि तुरंत लहंगा पहन ले.... पर कैसे?

सुमी को याद आने लगा वह साल जब वह दसवीं में पढ़ती थी,

और राहुल ने उसके घर के सामने ही एक कमरा किराए पर लिया था। क्योंकि राहुल ने वहां पर पॉलिटेक्निक में प्रवेश लिया था ।उसके कमरे की खिड़की राहुल के कमरे की खिड़की के बिल्कुल सामने थी ।धीरे-धीरे उसे राहुल अच्छा लगने लगा था।वह महसूस करती थी कि राहुल भी अपनी खिड़की से उसे ताकने की कोशिश करता है। दोनों ने बिना बोले ही एक टाइम टेबल बना लिया था कि कब-कब एक दूसरे को अपनी अपनी खिड़की से निहारना है ।वे दोनों बिना किसी चूक के अपनी-अपनी खिड़कियों पर टाइम से आ जाते, एक दूसरे को निहारते और मुस्कुराते।

राहुल ने घर की बाहर शाम को खेलने वाले उसके भाई सोनू जोकि सुमी से 5 साल छोटा था, से दोस्ती शुरू कर दी और उसके साथ खेलना भी शुरू कर दिया। राहुल जानबूझकर सोनू से खेल में हार जाता और उसे खेलने के नए-नए तरीके भी सिखाता। धीरे-धीरे सोनू राहुल का फैन हो गया ।अब तो घर में भी सोनू ....राहुल भैया.... राहुल भैया का गाना गाता और तारीफ करता ना थकता ।एक बार सोनू राहुल को घर ले आया तो राहुल ने बहुत ही नम्रता से सुमी के मम्मी पापा के पैर छुए और सभ्यता से बातचीत की। मम्मी पापा तो उसकी सज्जनता से अभिभूत थे। धीरे-धीरे मम्मी पापा का विश्वास राहुल पर बनता चला गया और सोनू को किसी काम के लिए बाहर भेजने पर मम्मी राहुल से सहायता लेने लगी। राहुल घर आता तो वह सुमी को मौका मिलते ही देखता और मुस्कुराता और सुमी के दिल की धड़कन तो उसे देखते ही बढ़ जाती थी।

कुछ दिनों के बाद वह दिन भी आ गया ,जब सुमी की सहेली के ना आने पर मम्मी ने राहुल से कहा .....बेटा.. क्या तुम आज सुमी को उसके स्कूल तक छोड़ आओगे ,उसकी सहेली नहीं आई है, उसी की साइकिल पर यह जाती है ।अब अगर पैदल जाएगी तो देर हो जाएगी। राहुल तो जैसे इसी मौके की तलाश में ना जाने कब से था ।तुरंत नम्रता से बोला हां ...हां ...आंटीजी क्यों नहीं....। रास्ते भर सुमी और राहुल खुशी से सराबोर थे ।स्कूल के सामने राहुल की बाइक से जब सुमी उतरी और राहुल को देखा तो दोनों की भावनाएं काबू से बाहर हो रही थी.... पर सुमी ने कुछ देर उसे देखकर थैंक्स बोला और स्कूल के अंदर चली गई।

अब तो अक्सर यह होने लगा कि सुमी को कहीं जाना होता तो मम्मी पूरे अधिकार और विश्वास से राहुल से कह देती थी ...कि बेटा ...अगर टाइम हो तो सुमी के साथ चले जाओ ।रास्ते में दोनों खूब सारी प्रेम भरी बातें करते। राहुल अपनी बाइक खूब धीरे चलाता जिससे ज्यादा से ज्यादा टाइम सुमी के साथ बिता सकें।

अब तो मम्मी आए दिन राहुल को कभी नाश्ते पर ,कभी लांच ,पर कभी डिनर पर बुला लेती । पापा भी कहते... अरे बेचारा ...अपने घर से दूर रहता है। यही खा लेगा ,और है भी कितना सभ्य ...। सुमी और राहुल का इश्क परवान चढ़ने लगा।

   1 दिन सुमी बोली मम्मी गणित के कुछ सवाल हल नहीं हो रहे हैं क्या राहुल के कमरे पर जाकर उससे पूछ लूं ।सुमी उस समय बहुत खुश हो गई जब हां कहने में मम्मी ने एक क्षण भी नहीं लिया ।अब तो राहुल और सुमी के वारे न्यारे थे ।जब चाहे राहुल सुमी के घर आता और जब चाहे सुमी किसी न किसी बहाने से राहुल के कमरे पर चली जाती। दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगी थी।

   .......पर अब शायद दोनों के हाव-भाव देखकर मम्मी को दोनों पर शक होने लगा था। क्योंकि राहुल के घर आने पर प्रसन्न होने वाली सुमी की मम्मी अब राहुल के यह कहने पर....,... आंटी जी चाय पिला दीजिए...... पर बुझे मन से चाय बनाती थी ।जब भी सुमी गणित के सवालों के लिए राहुल के कमरे पर जाने के लिए कहती, मम्मी मना कर देती थी।

वह डरावना दिन सुमी भूल नहीं सकती ,जब मम्मी से बिना पूछे चुपके से गणित की किताब के साथ वह राहुल की कमरे पर चली गई थी। दोनों एक-दूसरे को बाहों में भर कर खड़े थे ...कि मम्मी वहां पहुंच गई थी। सबसे पहले मम्मी ने राहुल को झन्नाटेदार चांटा मारा और सुमी को मारते मारते घर लाई थी। घर में एक तूफान आ गया था। मम्मी ने सुमी की डंडे से पिटाई की और कमरे में बंद कर दिया था। उसी दिन सुमी के कमरे की खिड़की को लकड़ी के टुकड़ों में कीलें ठोककर बंद कर दिया गया था।

   एक हफ्ते बाद सुमी की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गई थी।पापा सुमी के साथ सेंटर तक जाते थे और जब परीक्षा खत्म होने के बाद सुमी बाहर निकलती ,तो पापा बाहर ही खड़े मिलते थे।अब राहुल और सुमी के पास बातचीत का कोई साधन नहीं था। उस समय मोबाइल फोन प्रचलन में नहीं थे, और सुमी के घर में जो लैंडलाइन फोन था, उस पर अब पापा ने ताला लगा दिया था।

    एक दिन सुबह-सुबह राहुल की मकान मालकिन का 10 साल का बेटा भागता हुआ आया और सुमी के हाथ में गुड़ी मुड़ी कागज का टुकड़ा थमा कर भाग गया। उस समय मम्मी के पैरों में दर्द होने के कारण दरवाजे से सुमी ठेले वाले से सब्जी ले रही थी। मम्मी भी यह देख नहीं पाई थी। सब्जी मम्मी के पास रखकर सुमी अपने कमरे में चली गई और कांपते हाथों से वह कागज का टुकड़ा खोला। उसमें लिखा था.... "कल तुम्हारा पेपर है... तुम लड़कियों की लाइन में सेंटर के अंदर जाने के लिए लगोगी, तभी मेरा एक दोस्त एक कागज पर लिखा पता पूछने के लिए तुम्हारे पापा को व्यस्त कर देगा। तुम तुरंत ही लाइन से निकलकर लाल बाइक पर जो मेरे दोस्त की है, बैठ जाना ।मैं मेरी बाइक नहीं लाऊंगा, तुम्हारे पापा पहचान लेंगे।.... मैं फुल फेस हेलमेट लगाकर वहां पहले से ही खड़ा रहूंगा ।तुम ही तुरंत बैठकर एक दूसरा फुल फेस हेलमेट पहेन लेना, वह में अपने साथ लाऊगा।..... तुम्हारा राहुल"

   अगले दिन राहुल और सुमी इसी तरह से वहां से भागे और बस स्टॉप पर पहुंचे ।राहुल बस से सुमी को अपने घर से ले गया।सुमी को देखते ही राहुल के पापा बुरी तरह बिफर पड़े और राहुल से कहा सुमी को तुरंत उसके घर वापस छोड़ आओ। उस समय सुमी की उम्र 16 साल की थी, वह बालिग नहीं थी। मगर सुमी और राहुल दूसरी बस से राहुल के दोस्त के घर लखनऊ चले गए। 1 दिन के बाद राहुल सुमी को लेकर अपने एक रिश्तेदार के यहां चला गया ।इसी तरह से दोनों 1 सप्ताह तक यहां से वहां भागते रहे ।और उधर सुमी के मम्मी पापा पता ढूंढते ढूंढते राहुल के घर पहुंच गए। मम्मी का रो-रोकर बुरा हाल था ।आखिर उनकी नासमझ बेटी ने समाज में उनका भरपूर अपमान कर दिया था। आखिर में सुमी और राहुल दोनों के माता-पिता ने कोई और रास्ता ना देखकर दोनों को बुलाया और 1 घंटे के अंदर समाज मंदिर में उनकी शादी करा दी। सुमी की शादी में ....ना बाराती थे.....ना सहेलियां....ना नए कपड़े..... और ना ही दुल्हन के लिए नया लाल लहंगा.......।... ओहो..... आज लहंगे की वजह से उसने एक बार फिर अपना भूतकाल जी लिया था।

   सुमी सोचने लगी कि उसने भी अपनी मां को आंसू और अपमान दिए थे, तो उसे भी कैसे खुशियां और शांति मिलती।.... बाद में पता चला था कि राहुल का उसके लिए प्रेम आत्मिक ना होकर शारीरिक ही था .... ...खैर जिंदगी चल ही रही थी।

    अब सुमी के देवर की शादी होने वाली थी और नई बहू के स्वागत के लिए घर में पुताई चल रही थी .....निमंत्रण पत्र छप रहे थे .....कपड़े गहने खरीदे जा रहे थे..... बरात घर की बुकिंग.... पकवानों के लिस्ट.... सब हो रहा था। आज सुमी को समझ आ गया था कि भागकर की हुई शादी कितनी बेरंग होती है।

   .....अरे सुमी देख लिया लहंगा ....लाओ इसे भी पैक करवा दूं।..... सासू मां सुमी से कह रही थी।


Rate this content
Log in

More hindi story from Sadhna Singh

Similar hindi story from Inspirational