Rajshekhar Choubey

Inspirational


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Rajshekhar Choubey

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कोविड 19

कोविड 19

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       सुरेश और अब्दुल बचपन के दोस्त थे।सुरेश भागता हुआ अब्दुल की अम्मीजान के पास पहुँचा और अब्दुल की शिकायत करने लगा कि वह उसके साथ मारपीट कर रहा है अम्मीजान ने उसे प्यार से अपने पास बैठाया और सेवइंयां खिलाई।उन्हें मालूम था जब भी सुरेश को कुछ खाना होता तो वह अब्दुल की शिकायत लेकर घर आ जाता था ,यही हाल अब्दुल का भी था वह सुरेश की शिकायत लेकर उसकी माँ के पास जाता और खीर खाकर ही वापस आता ।दोनों साथ में ही खेले कूदे साथ में ही पढ़ाई भी पूरी की। दोनों ही पढ़ाई में कमजोर थे,ले देकर स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी । दोनों का व्यक्तित्व आकर्षक था। अपने-अपने समुदाय में दोनों की पूछ परख भी काफी थी। इन्हीं सब कारणों से दोनों ने नेतागिरी में हाथ आजमाना चाहा। दोनों ही एक दूसरे की विरोधी पार्टी में शामिल हो गए । दोनों पहले पार्षद बने और बाद में विधायक भी बन गए । इसी बीच सुरेश ने मार्च के महीने में अपने घर पर ही एक धार्मिक आयोजन प्रारंभ किया देखते ही देखते इसने भव्य रूप धारण कर लिया और उसमें हजार लोग हिस्सा लेने लगे। इस आयोजन से प्रेरणा लेकर अब्दुल ने भी एक धर्मगुरू को बुलाकर मजहबी जलसा शुरू किया । इस जलसे ने भी बड़ा रूप ले लिया ।सन् 2020 में भी दोनों आयोजन होने थे परन्तु पूरे विश्व को कोविड-19 नामक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था । कोरोना वायरस से फैलने वाली यह बीमारी चीन से अन्य देशों में फैल गई । लगभग 100 से अधिक देश इसकी चपेट में आ गये थे । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया। कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के द्वारा खांसने छींकने या थूकने से प्रायः फैलती है और यह वायरस सभी सतहों जैसे कपड़े प्लास्टिक सब्जी मेटल पर कई घण्टों तक जिंदा रह सकता है। अतः इस महामारी से बचने के लिए एकांतवास (Quarantine) दैहिक दूरी (Social Distancing) और पूर्ण बंदी (Lockdown) ही मुख्य उपाय थे। उक्त दोनों आयोजन 26 मार्च को होने थे परन्तु इसी दौरान 21 दिन का लाकडाउन कर दिया गया। हालांकि दोनों आयोजनों की पूरी तैयारी हो गई थी फिर भी दोनों आयोजन रद्द करने पड़े। 

            सुरेश और अब्दुल दोनों ही काफी धार्मिक प्रवृत्ति के थे और धर्म के काम में दिल खोलकर खर्च करते थे । सुरेश को अपने भगवान पर और अब्दुल को अपने खुदा पर पूरा एतबार था । सबकी सलाह और चेतावनी की सुरेश ने अनदेखी की और अपने घर में गुप्त रूप से आयोजन किया। सुरेश के आयोजन में उसके दो मित्र जो अमेरिका से लौटे थे शामिल हुए। बाद में पता चला कि ये दोनों कोरोना वायरस से संक्रमित थे परन्तु उनमें अभी लक्षण नहीं उभरे थे । इसी तरह अब्दुल के जलसे में भी उसके दो मित्र इग्लैड से लौटे थे, शामिल हुए । इनका भी वही हाल था। सुरेश को अपने भगवान पर और अब्दुल को अपने खुदा पर पूरा भरोसा था और उन्हें पूरा विश्वास था कि उन्हें कुछ नहीं होगा परन्तु होनी को कुछ और ही मंजूर था। सुरेश के आयोजन में शामिल होने वालों में कुछ को बुखार आया। सभी लोगों को एकांतवास में रहने को कहा गया और सभी का टेस्ट भी किया गया। कुल 10 लोगों का कोविड-19 का टेस्ट पाजीटिव पाया गया। इसी तरह अब्दुल के आयोजन में शामिल लोगों को एकांतवास में भेजकर सभी का टेस्ट किया गया । इसमें कुल 12 लोगों का टेस्ट पाजीटिव पाया गया । सभी कोरोना पीड़ितों खासकर सुरेश और अब्दुल विधायक भी थे ,भरपूर ईलाज किया गया । फिर भी दोनों को बचाया नहीं जा सका। सुरेश के चार साथी और अब्दुल के पांच साथी भी इस बीमारी से चल बसे। 

                       जैसी कि आम धारणा है सुरेश अपने साथियों के साथ नरक और अब्दुल अपने पांच साथियों के साथ दोजख पहूंचे । चूंकि दोनों विधायक थे स्वर्ग और जन्नत यहां देख ही चूके थे । दोनों का यही सोचना था कि हमने तो धार्मिक आयोजन ही किया था और हमारे साथ ही ऐसा क्यों हुआ। सुरेश भगवान के सामने उपस्थित हुए और उनसे विनम्रतापूर्वक अपना सवाल किया । भगवान ने जवाब दिया -

‘’ वैश्विक महामारी कोई क्षेत्र जाति धर्म समुदाय देखकर नहीं आती। सभी पर उसका कहर टूटता है। वैश्विक महामारी फैली है तो तुम्हारी पहली जिम्मेदारी है कि इससे अपने को और अपने परिवार को बचाना । सभी को मालूम है कि कोविड-19 अत्यंत संक्रामक रोग है और इससे बचने के लिए एकांतवास दैहिक दूरी और पूर्णबंदी ही आवश्यक है। मनुष्य को मैंने बुद्धि व विवेक इसलिए दिया है कि वह बुद्धि और विवेक से निर्णय ले सके। भगवान पर भरोसा और विश्वास ठीक है। परन्तु तुमने जो किया वह अंधविश्वास है विश्वास नहीं। क्या तुम भगवान का नाम लेकर नदी में छलांग लगा सकते हो या रेलगाड़ी के सामने आ सकते हो ,नहीं ना । तुमने गीता अवश्य ही पढ़ी होगी इसमें मैंने कहा है कि कर्म करो और फल की चिंता मत करो । तुमने न तो अपना कर्म किया और न ही अपना कर्तव्य निभाया । जो भी तुम्हारे साथ हुआ उसके जिम्मेदार तुम और केवल तुम ही हो। ‘’

इसी तरह अब्दुल खुदा के पास पहुंचा और अपना सवाल दोहराया। खुदा ने अब्दुल से कहा -“तुम्हें मालूम ही है कि कोविड-19 अत्यन्त संक्रामक बीमारी है और कोरोना वायरस तेजी से फैलता है । अब्दुल शायद तुम्हें मालूम होगा कि मस्जिदों में सामूहिक नमाज से पवित्र काबा पर दिन रात लगातार चलने वाली तवाफ (परिक्रमा) तक बंद की जा चुकी है। मोहम्मद पैगम्बर ने स्पष्ट बताया कि जिस जमीन (प्रदेश देश) में वबा (महामारी) फैल जाए तुम उस जगह न जाओ और तुम जहां रहते हो अगर वहां वबा फैल जाए तो तुम उस जमीन को छोड़कर न जाओ यही लॉकडाउन है उन्होंने यह भी कहा कि किसी बीमार ऊँट को स्वस्थ ऊँट के पास न लाओ और किसी बीमार व्यक्ति को स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क से दूर रखो यही एकांतवास और दैहिक दूरी है जिसकी गुजारिश प्रशासन ने भी की थी। हजयात्रा भी रद्द की जा चुकी है । जहां पर एकांतवास दैहिक दूरी और पूर्ण बंदी की बात हो रही थी । वहां तुमने मजहबी जलसे का आयोजन किया । तुमने अपने दिमाग व सूझबूझ का सही इस्तेमाल नहीं किया ।तब्लीगी जमात वालों ने भी वही गलती की। तुमने न ही सही कर्म किया और न ही अपना कर्तब्य ही पूरा किया। जो भी हुआ उसकी जिम्मेदारी तुम पर ही है ।  

सुरेश और अब्दुल को अब सब कुछ समझ आने लगा था। दोनों ही इसी सोच में डूबे हुए थे । इसी बीच नरक और दोज़ख के मुस्टंडे आ गए और दोनों को खौलते तेल की कड़ाही की ओर खींचने लगे। दोनों ही अपने आपको बचाने के लिए हाथ-पांव मारने लगे और चिल्लाने लगे बचाओ-बचाओ।

तभी अब्दुल की नींद खुली उसकी अम्मीजान उसे झझोड़कर उठा रही थी। वह डर के मारे बुरी तरह कांप रहा था। अम्मी ने पूछा क्या- तुमने कोई बुरा सपना देखा ? अब्दुल ने कहा सपना नहीं सच्चाई। इसी तरह सुरेश भी नींद में बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा था। उसकी मां ने उसे उठाया। सुरेश ने आंखे खोलकर अपनी मां को देखा एक पल के लिए उसे लगा उसकी मां भी मरकर नरक आ गई है और इसका जिम्मेदार मैं ही हूं। बाद में उसे वास्तविकता का एहसास हुआ और उसने भगवान को धन्यवाद दिया और सोचा जान बची सो लाखों पाए। 

स्वाभाविक रूप से सुरेश और अब्दुल ने अपने अपने धार्मिक आयोजन रद्द कर दिये और दोनों यही सोच रहे थे कि मरने के बाद ही स्वर्ग दिखता है परन्तु उन्हें बिना मरे ही नरक और दोजख दिख गया था।


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