STORYMIRROR

Ekta Sharma

Drama

3  

Ekta Sharma

Drama

झूठी पतंग

झूठी पतंग

1 min
413

जब हम छोटे बच्चे थे बड़े बड़ों को देखकर पतंग उड़ाने का बहुत मन करता था आसमान में चारों और पतंगे ही पतंगे उड़ती रहती थी रंग बिरंगी पतंगें। पूरा आसमान रंगीन हुआ करता था !

बेशक पतंग उड़ाने नहीं आती थी फिर भी जिद करते थे कि पैसे दो पतंग लाएंगे और दादी हमारी हमें प्लास्टिक की पन्नी में या कागज में धागा बांध कर दे देती थी कि लो पतंग उड़ा लो !

हम आगे भागते रहते और हमारा कागज धागे के साथ उड़ता रहता था!!वह जमाना भी कुछ और था वह बसंत भी कुछ और था तब दादी की खुशी में ही हमारी खुशी थी

मीठे चावल बना कर और झूठ मूठ की पतंग उड़ा करी हम बसंत पंचमी मना लिया करते थे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Drama