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Jalaram Nayak

Drama

3  

Jalaram Nayak

Drama

इंटरनेट

इंटरनेट

2 mins
324

विद्यालय में एक शिक्षक साथी के अवकाश पर रहने पर प्रिंसिपल साहब द्वारा मुझे मेरे खाली कालांश में कक्षा 7th में जाने का आदेश दिया गया। मैं छठवें कालांश में विद्यार्थियों से खचा खच भरे कक्षा कक्ष में पहुँचा, कालांश सामाजिक विज्ञान का था। बच्चों ने मुझे बताया कि आज 11वां पाठ पढ़ाना है। मैंने एक बच्चे से क़िताब माँगकर विवरणिका देखी तो 11वें पाठ का टॉपिक था " बच्चों_में_इंटरनेट_के_खतरे।

मैं किताब को साइड में रखकर स्टेप बाइ स्टेप बच्चों को इंटरनेट के दुष्परिणाम समझा रहा था। मैंने उन्हें समझाया कि... सोशल मीडिया ने समय की बर्बादी को बहुत बढ़ावा दिया है। किशोरावस्था की उम्र में बच्चे चकाचौंध और ग्लैमर की ओर आकर्षित होते हैं। वे अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों को सोशल मीडिया पर अपने फ़ोटो और पोस्ट दिखाने के बारे में चिंतित रहते हैं। इसके बाद वे लाइक्स और टिप्पणियों को देखने के लिए अपनी पोस्ट को दोबारा चेक करते रहते हैं। ऐसा करने में बहुत समय बर्बाद होता है। डेटिंग और चैटिंग ऐप्स भी पढ़ाई में बाधा साबित होती हैं........ वगैरह वगैरह।

35 मिनट जाने कब बीते, पता ही नही चला और विद्यालय की घण्टी बज गई। मैं मन ही मन बड़ा खुश था की बच्चों को इंटरनेट से बचाने में मेरा ये प्रयास सफल रहेगा। मैं कक्षा से बाहर निकला ही था कि तभी मेरे पीछे दो बच्चे तेजगति से सर सर पुकारते हुए आये और बड़ी विन्रमता से मुझे पूछा कि सर आपकी फेसबुक आईडी क्या है ? मैं यकायक स्तब्ध रह गया, एक पल तो उन्हें घूरता रहा और फिर खुद को संभालते हुए, बदहवासी में नजरें जमीन पे टिकाये ऑफिस की तरफ मन में बवंडर लिए चुपचाप बढ़ गया, मानो उन्हें जवाब देने के लिए मेरे मुँह में जुबान भी न थी।


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