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ARCHANNAA MISHRAA

Inspirational

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ARCHANNAA MISHRAA

Inspirational

इंसानियत

इंसानियत

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बात कुछ वर्षों पूर्व की है, एकता को एक दिमागी बीमारी थी, उसके कई टेस्ट कराए गए, उसकी दवाइयाँ भी चली, पर एकता की बीमारी में कुछ ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ा।

   उन्हीं के रिश्तेदारों ने चण्डीगढ़ का नाम सुझाया, बताया गया कि वहाँ एक डॉक्टर हैं जो एकता कि बीमारी का सम्पूर्ण निदान कर देंगे। एकता के पिता ने सोचा जब इतनी जगह दिखा चुके हे तो वहाँ भी दिखा देते हैं।

   अगले दिन तैयारी की गई एकता ओर उसके पिता ने दिल्ली बस अड्डे से चण्डीगढ़ के लिए बस ली। यही कुछ पाँच - छः घंटों के बाद वो लोग पहुँच गयें। बहुत देर हो गई थी तो उन्होंने एक होटेल किया क्यूँकि डॉक्टर अगले दिन ही अब एकता को देखता। 

अगली सुबह वो लोग तय्यार होकर डॉक्टर के यहाँ पहुँचे। डॉक्टर ने ठीक से जाँच करने के पश्चात कुछ दवाइयाँ लिखी जो वहीं से लेनी थी 

डॉक्टर ने आश्वासन दिया की एकता ठीक हो जाएगी। दवाइयाँ बस थोड़ी लम्बी चलेंगी। इसके पश्चात पिताजी ने दवाइयाँ ख़रीदीं। दवाइयाँ कुछ पाँच - छः हज़ार की रही होंगी। उसके बाद वो लोग होटेल आए वहाँ विश्राम कर, होटेल का बिल चुकता कर वहाँ से चण्डीगढ़ बस अड्डे के लिए निकले। वह थोड़ी देर प्रतीक्षा करने के बाद बस आ गई जो दिल्ली जाती थी 

फिर वो दोनों लोग बस में चढ़ गए। कुछ एक दो मिनट के बाद एकता के पिताजी ने अपना पर्स खोला टिकिट लेने के लिए, पर्स देखते ही उनके चेहरे की हवाइयाँ उड़ गई, क्यूँकि उसमें बहुत कम पैसे थे जो की टिकिट के लिए पर्याप्त नहीं थे।

थोड़ी देर कुछ सोचने के पश्चात एकता के पिताजी ने पूरी बात बस के कंडक्टर को बताई। कंडक्टर बहुत दयालु था उसने इंसानियत दिखाते हुए उन लोगों की तकलीफ़ समझते हुए बिना पैसे लिए ही उनकी टिकिट बना दी। उन्हें बस में सीट भी दिला दी। इसके बाद एकता के पिताजी ने कंडक्टर का कोटि कोटि धन्यवाद दिया ओर सकुशल घर की ओर प्रस्थान किया 


इस कथा के माध्यम से हम जान सकते हे की जहाँ व्यभिचार, लूट मार एकदम अपने चरम पर हो वही कुछ लोगों की ईमानदारी व नेक भावना ने इंसानियत को ज़िंदा रखा हें। इन कंडक्टर की सहृदयता से मैं इतना प्रभावित हुई की मैंने ठाना मैं भी अपने जीवन मैं किसी ना किसी तरह जरूरतमंदो की मदद ज़रूर किया करूँगी 


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