अनोखा रिश्ता ( दोस्ती )
अनोखा रिश्ता ( दोस्ती )
हमारे देश में अनेक विषमताओं के होते हुए भी एक एकता है। देश की मजबूत इकाई परिवार हैं। इन्हीं परिवारों में भी कई असमानताएँ होते हुए भी समानता होती है, ओर परिवार की मजबूत इकाई हमारे रिश्ते होते है, ये रिश्ते भी अपने साथ रंगों की अनेक छटा बिखेरे हुए होते है, यूँ तो हर रिश्ता अपने आप में ख़ास ओर अद्वितीय है, पर कुछ रिश्ते ओर बंधन अनोखे होते है, हर रिश्ते की अपनी सीमाएँ ओर मर्यादायें है। कुछ रिश्ते नाम से भी ऊपर होकर बेनाम होते है, लेकिन साथ ताउम्र निभाते है, आपके वजूद, आपके हक़ के लिए हमेशा खड़े रहते है, ”(क्या गर्मी क्या ठंडी, क्या धूप क्या बरसात ।अनोखे रिश्ते ना देखें उम्र ना कोई दीवार)
इन रिश्तों में समाज की कई रवायतें भी शामिल है, कई रिश्तों पर तो एकदम पैनी नज़र भी रखी जाती है, ये रिश्ते सबके लिए अपनी अपनी परिभाषा लिए हुए हे। ये लेख पढ़ते हुए सबके ज़हन में अपने अनोखे रिश्तों की झलक अवश्य उभरी होगी। माँ - बेटी, सास - ननद, पोता - पोती, पति -पत्नी ऐसे ही अनगिनत रिश्ते हम समाज में स्थापित करते है, इनमें से या इनसे इतर भी कई रिश्ते बनाते है, इन्हीं रिश्तों में से अनोखे रिश्तों का जनम होता है, जो बिना लाग लपेट, मोह माया के बिना ही आपसे जुड़े रहते है ऐसे रिश्तों को शब्दों में बांध पाना बड़ा ही कठिन कार्य होता है, इनका अहसास ही हमारे लिए खास हो जाता है, इन रिश्तों का अहसास हर पल ही हमारे साथ रहता है, (जैसे मीरा के श्याम ओर शबरी के राम )
इन रिश्तों में कहीं से लोभ की, या उम्मीदों की बू नहीं आती जो कि आज का चलन बन गया है, एक ग्लास पानी पिला के भी लोग कितनी उम्मीदें बांध लेते है, अप्रतिम ओर अद्वितीय होते है ऐसे लोग ओर ऐसे रिश्ते ।ऐसे रिश्तों को सदैव सहेज कर रखें, इन्हीं शुभ भावनाओं के साथ चंद पंक्तियाँ ओर कहूँगी (कभी नम है, कभी ग़म है, कहीं तो नज़रों में पानी कम है, जो छटा बिखरी हैं धरा पर उसे अपनाइये, अनोखे रिश्तों के प्यार में झूम झूम जाइए)
