STORYMIRROR

ARCHANNAA MISHRAA

Others

2  

ARCHANNAA MISHRAA

Others

बरसात

बरसात

2 mins
67


बात ये बहुत वर्षों पूर्व की हैं, लेकिन मानस पटल पर इस प्रकार अंकित हैं की जैसे कल ही की बात हों। बात मेरे विवाह पूर्व की हैं, मुझे दिखाने के लिए एक सावन का दिन तय किया गया। जिस दिन का तय था उसी दिन भोर से ही इंद्र देवता की बड़ी कृपा रही, वो सुबह से ही जमकर बरसे, घनघोर बारिश हो रहीं थी, ऐसे में लग ही नहीं रहा था की हम लोग घर से निकल पाएंगे। फिर भी पिताजी ने क़रीब दस बजे ड्राइवर को बुलाया, वो गाड़ी लेकर आएँ ओर हम लोग प्रभु का नाम लेकर मंदिर की तरफ़ निकले। इतने तेज धुआँधार बारिश थी, की कुछ सूझ ही नहीं रहा था। हमें जाना छतरपुर मंदिर था ओर हम पहुँच गए अक्षरधाम मंदिर, ये एक ओर विपदा आ गई, फिर हम लोग आनन फ़ानन में छतरपुर मंदिर के लिए निकले। क़रीब दो या तीन बजे हम लोग वह पहुँचे, जब तक बारिश भी कुछ कम हो गई थी, कहाँ तो हम लोगों को स्वागत के लिए खड़ा रहना था, कहाँ तो वो लोग ही हमारे स्वागत के लिए खड़े थे। फिर मैं गाड़ी से उतरी तो वहीं सब लोगों ने मुझे देख लिया, फिर तो उसके बाद दिखाई की रस्म एक खाना-पूर्ति ही रही। फिर मुझसे और इनसे बोला गया की साथ थोड़ा घूम के आओ, उसके बाद हम लोग घूमने गए, अब बरसात थोड़ी थम गईं थीं, मौसम बड़ा सुहाना हो गया था, ठंडी हवा बह रहीं थी, उसपर मिट्टी की सौंधी सौंधी ख़ुशबू से वातावरण मनमोहक बन गया था। फिर हम लोग घूम के वापिस आएँ तो मेरा साड़ी का पल्लू नीचे मिट्टी में घिसट रहा था, तभी इन्होंने कहाँ ज़रा अपना पल्लू सम्भाल लीजिए, ये सुनना ही था की मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया। ये एक ऐसा वाकया था की आज भी जब ये पल याद आता हैं तो मुझे रोमांचित कर जाता हैं। बस यही से मेरे ओर इनके जीवन में प्रेम का बीजारोपण हो गया। यही से हमारे जीवन की एक नयी कहानी शुरू हुई।  


Rate this content
Log in