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Aditya Vats

Inspirational

3  

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गंगा दशहरा

गंगा दशहरा

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गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ। 


मुनि विश्वामित्र जी श्रीराम लक्ष्मण को लेकर अपने आश्रम पहुँचे जहाँ प्रभु श्रीराम ने ताड़का और सुबाहु का वध किया और मारीच को बिना फल का वाण मारा जिससे मारीच सौ योजन (चार सौ कोश) समुद्र के पार गिरा। इस प्रकार प्रभु श्रीराम ने मुनि जी के यज्ञ की रक्षा की। वहाँ से मुनि जी दोनों भाइयों को लेकर जनकपुर चले और गंगा जी के तट पर पहुँच कर गंगा जी की महिमा का वर्णन किया और गंगा जी के पृथ्वी पर अवतरण से ले कर गंगासागर में समुद्र से मिलन तक मुख्य मुख्य तीर्थों का वर्णन किया। (गंगा मेरे घर के पास से गुजरी हैं जहाँ गंगा ने सरयु और सोन नदी से मिल कर त्रिवेणी संगम बनाया है। यहाँ मैंने अपने लिये भक्त शब्द का प्रयोग किया है। मैंने गंगा को स्वच्छ रखने के लिये जगत को संदेश भी दिया है) :-----


हर हर गंगे हर हर गंगे, 

पतित पावनी हर हर गंगे । 

प्रभु के चरण से निकली गंगे, 

शिव की जटा समाई गंगे, 

रजा भगीरथ करी तपस्या, 

तब पृथ्वी पर आई गंगे । 

हर हर गंगे............

चल कर पहुँची हरिद्वार, 

जहाँ पावन तिरथ बनाई गंगे, 

चलत चलत पहुँची त्रिवेणी, 

तिर्थ प्रयाग बसाई गंगे । 

हर हर गंगे........... 

चल कर पहुँची शिव की नगरी, 

काशी तिरथ बसाई गंगे, 

नाम मंत्र दे कर के शिव ने, 

मुक्ती दाई बनाई गंगे । 

हर हर गंगे...........

चल कर पहुँची कौशिक आश्रम, 

मुनि ने महिमा गाई गंगे, 

पहुँची गंगा भक्त के द्वारे, 

वेणी तीन बनाई गंगे । 

हर हर गंगे...........

चल कर पहुँची गंगासागर, 

पावन तिरथ बनाई गंगे, 

तारे सगर राज पुत्रों को, 

सागर मध्य समाई गंगे । 

हर हर गंगे...........

धन्य भाग्य भारत भूमी का, 

आ कर जहाँ पधारी गंगे, 

विनती करौं युगल कर जोरी, 

राखो गंगे पावन गंगे । 

हर हर गंगे...........


   


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