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Shashi Srivastava

Inspirational

4  

Shashi Srivastava

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एक रिश्ता ऐसा भी

एक रिश्ता ऐसा भी

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गर्मियों की दोपहर का समय था। दरवाजे की घंटी बजती है मन में ख्याल आया इस समय कौन हो सकता है। दरवाजा खोला तो सोसाइटी की गार्ड थी। वह बोली मैडम मंदिर के लिए भेजा गया है आप कुछ योगदान देना चाहेंगे। सांवली सलोनी लगभग 27, 28 वर्ष की लड़की थी। उन दिनों गर्मी बहुत हो रही थी मैंने उससे प्यार से पूछा आप पानी पियेगी। वह कुछ सकुचा कर बोली पिला दीजिए। मैंने मिठाई व पानी उसको दरवाजे पर ले जाकर दिया। मेरा घर पहली मंजिल का है वह सीढ़ियों पर बैठ गई आराम से पानी पिया। मुझे वह बहुत अच्छी लगी मैं उससे बातें करने लगी। उसे भी लगा वह कुछ देर आराम से बैठ जाएगी। बातों बातों में उसने बताया कि उसका तलाक हो चुका है मैंने पूछा कि कोई बच्चा भी है। वह बोली नहीं आंटी यह भगवान का शुक्र है कि बच्चा नहीं है। अगर बच्चा होता तो उसकी जिम्मेदारी भी मेरे ऊपर ही रहती। मैंने पूछा तलाक क्यों हुआ उसने बताया कि वह शराब पीकर हंगामा करता था। पति के माता-पिता नहीं थे। उसकी बस एक दादी थी। उन्होंने ही कहा कि तुम चाहो तो छोड़ दो दादी जी मुझे बहुत प्यार करती हैं। मुझे बहुत अचरज हुआ की दादी ने पोते का साथ न देकर उसकी पत्नी का साथ दिया। वह बोली कि जब मैं छुट्टियों में घर जाती हूं। तो अपनी दादी सास से मिलने जरूर जाती हूं। दादी कहती हैं कि कोई अच्छा सा जीवनसाथी मिले तो शादी कर लो मैं शादी में चार पांच लाख रुपए दे दूंगी। मैं अचरज से उसे देखती रह गई । उसकी बातों में अपनी दादी सास के प्रति अनंत प्रेम दिख रहा था। मुझे लग रहा था इस दुनिया में एक रिश्ता ऐसा भी है। नमन है उस दादी सास को जिन्होंने स्त्री होकर स्त्री का दर्द समझा। समाज में ऐसे उदाहरण बहुत ही काम देखने को मिलते हैं।


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