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Shashi Srivastava

Others

4.7  

Shashi Srivastava

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पूछो नहीं सिर्फ बताओ

पूछो नहीं सिर्फ बताओ

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हमारी शादी के 14 वर्ष हो चुके थे ।शादी के बाद संयुक्त परिवार में आई थी। सभी परिवार के लोग बहुत अच्छे थे। शादी के 14 वर्ष तक ग्रहणी रहने के बाद मुझे सरकारी नौकरी मिल गई मेरी नौकरी लगने पर मेरे पति की खुशी अलग ही दिख रही थी। नौकरी करते हुए मुझे शिक्षक संगठन के लिए कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। मुझे उसमें प्रतिभा करने के लिए हरिद्वार से देहरादून जाना था। मैंने अपने पति से आज्ञा मांगी तो उन्होंने बहुत प्यार से कहा कि जाओ। फिर कुछ समय पश्चात मुझे दिल्ली जाने का अवसर मिला जिसमें विदेशों से भी लोग आने थे और हमारे राज्य उत्तराखंड से सिर्फ तीन शिक्षको ही जाने थे। उसमें मुझे जाने का अवसर मिल रहा था। मैंने अपने पति से हिचकिचाते हुए पूछा कि क्या मैं दिल्ली वर्कशॉप में जाऊं या नहीं क्योंकि समय उसमें अधिक था। 15 दिन के लिए जाना था मेरे पति ने बड़ा प्यारा जवाब दिया कि शशि मुझसे पूछ मत करो सिर्फ बताया करो कि मैं जा रही हूं। यह सुनने के बाद मैं भावुक हो गई । एक स्त्री को इतनी स्वतंत्रता देने वाले पुरुष बहुत कम होते हैं। बहुत भाग्यशाली होती है वह स्त्री जिन्हें ऐसे विचार वाले जीवन साथी मिलते हैं।


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