एक अनजान सफ़र
एक अनजान सफ़र
एक अनजान सफर
सफर उस समय का था जब विक्रम महज़ 22 साल का नौजवान था! विक्रम एक सीधा साधा लडका था ! एक दीन विक्रम अपने भाई के साथ घर पेंटींग के काम के लिए वो एक बगल के शहर में गया ! दो तीन दीन ऐसा ही सिलसिला चला अचानक काम खत्म कर के वो घर की और निकलने वाला ही था तभी अचानक उसकी नजर उस लडकी पर पडी, उसकी एक झलक से विक्रम दिवाना हुआ मानलो उस लडकी ने उस पर जादू कर दिया हो!उसकी नजर उसका हसना उसका बाते करना विक्रम के दिल पर छप सा गया ! विक्रम को उस लडकी से प्यार हो गया वो लडकी भी पता नहीं विक्रम से प्यार करती थी या नहीं उसके साथ टाईम स्पेंट करना चाहती थी या कुछ और विक्रम उस लडकी के प्यार में पुरा डूब गया! धीरे धीरे वो लडकी भी विक्रम के नजदीक आती थी विक्रम से बात करती थी विक्रम के साथ घुमना फिरना रोज़ का था,विक्रम को देख कर मुस्कूराती थी! अब विक्रम को वो घर पेंटींग के काम से भी प्यार हो गया जो की उसके भैया उसे मजबुरी में उसे ले कर गये! लेकिन उस काम को विक्रम ने अपना पेशा बना लिया अब तो समजो उस गाव से भी विक्रम को प्यार हो गया जहा वो लडकी रहती थी!उस गली में विक्रम हर रोज जाने लगा उसे देखे बगैर उसका दीन नहीं ढलता था उस लडकी का नाम हंसिका था जीसे विक्रम ने चाहा था! उस लडकी की एक छोटी बहण निकिता थी जो की उस समय छोटी थी! विक्रम से प्यार भरी बाते ही विक्रम को उसके इर्द गिर्द घूमने पर मजबुर कर रखा। 3 साल बीत चुके एक दिन विक्रम उसके गांव से वापिस लौट रहा था तो उसे गार्डन में वो लड़की एक लड़के के साथ दिखी वो लड़की मॉस्क पहने हुई थीं लेकिन विक्रम ने उस लड़की से सच्चा प्यार किया था विक्रम उस लड़की की आँखों में देख कर पहचान गया की वो कोई और नहीं उसकी हंसिका थीं।
विक्रम उस दिन खूब रोया यहां तक कि उस लड़की के गम में शराब पीने लगा! लगभग 2 साल तक उसने शराब पी विक्रम उस लड़की को भुलाना चाहता था ! लेकीन कभी भुला ना सका! वो हर रोज सोचता था शायद वो लड़की उसे एक पल के लिए भी प्यार किया था या नहीं! कुछ 2 या 3 साल में विक्रम के मन ने कहां की, क्यूं मैं उस लड़की से प्यार करूं जो की मुझसे कभी प्यार ही ना किया हो! कई साल बीत जाने के बाद अब विक्रम ने फैसला कर लिया की मैं, कोई Gov Job करलूंगा! यहाँ से विक्रम की ज़िंदगी का वो एक अंजान सफ़र शुरू होता विक्रम को तो gov Job मिलती हैं वो अब एक अफ़सर बनता हैं! जिस लड़की को विक्रम ने चाहा था उस लड़की की तो शादी हो चुकी थी! विक्रम ने क़भी सोचा भी नहीं था कहानी कुछ इस तरह से होगी हंसिका की जो छोटी बहन थी निकिता अब वो बड़ी हो चुकी थी विक्रम जिस बस से जॉब के लिए जाता उसी बस पर निकिता भी अलग डिपार्टमेंट के ऑफिस में जाती थीं! विक्रम जो की हेंडसम था उसपर कई लड़कियां मरती थीं! पहली झलक में निकिता विक्रम से प्यार कर बैठी! वो तो अनजान थीं इस बात से एक जमाने में उसकी बहन हंसिका का वो प्रेमी था! लेकिन पहले तो विक्रम निकिता को पहचान नहीं सका लेकिन कुछ दिनो बाद उसकी समझ में आया की वो निकिता थीं! किस्मत में घुमा फिरा कर विक्रम को उसी अंजान सफ़र पर लाकर रख दिया जहाँ विक्रम उस सफ़र को छोड़ चुका था! कमबख्त ज़ख्मी दिल ने विक्रम को फ़िर से एक बार प्यार की राह पर ला कर रख दिया!
विक्रम अब सोच में पड़ गया की प्यार करूं भी तो किस से जिसके बारे में मैने खाबो में भी नहीं सोचा इस अनजान सफ़र में सिर्फ मैं अकेला हु या मेरी तरह और भी कई ढेर सारे नौजवान हैं...... एक अनजान सफ़र जिसकी ना कोई मंजिल है....
