बुरातिनो - 17
बुरातिनो - 17
सिन्योर कराबास बराबास ने मुझे देख लिया.
अनुवाद: चारुमति रामदास
“तू छुपकर सुन रहा है, कमीने!” और वह मुझे पकड़ने के लिए उछला, ताकि आग में फेंक दे, मगर फिर से अपनी दाढ़ी में उलझ गया और भयानक धडाम के साथ, कुर्सियों को तितर बितर करते हुए, फर्श पर गिर पडा.
“याद नहीं है, कि मैं खिड़की के बाहर कैसे पहुंचा, कैसे फेंसिंग पर चढ़कर उससे बाहर आया. अँधेरे में हवा शोर मचा रही थी और बारिश थपेड़े मार रही थी.
“मेरे सिर के ऊपर काला बादल बिजली से चमक गया, और दस कदम पीछे मैंने भागते हुए कराबास बराबास और जोंकें बेचने वाले को देखा....मैंने सोचा: ‘मर गया’, लड़खड़ाया और किसी मुलायम और गर्माहट भरी चीज़ पर गिरा, किसी के कानों को पकड़ लिया...
“ये भूरा खरगोश था. वह भय से चीखा, ऊंची छलांग लगाई, मगर मैं उसके कानों को पकड़े रहा, और हम अँधेरे खेतों से, अंगूर के बागों से, सब्जियों के बगीचों से होते हुए भागते रहे.
“जब खरगोश थक गया और बैठ गया, अपमान से अपना कटा हुआ होंठ चबाते हुए, मैंने उसका माथा चूम लिया.
“प्लीज़, थोड़ा और, थोड़ा और भागेंगे, प्यारे भूरे खरगोश...”
“खरगोश ने गहरी सांस ली, और हम फिर से उछलते हुए जाने लगे, न जाने कहीं दायें, तो कहीं बाएं...
“जब बादल छट गये और चाँद निकल आया, तो मैंने पहाड़ के नीचे एक छोटा सा शहर देखा जिसमें अलग अलग दिशाओं में घंटाघर थे.
शहर वाले रास्ते पर कराबास बराबास और जोंकों का विक्रेता भाग रहे थे.
खरगोश ने कहा:
“एहे हे, ये है खरगोश की खुशी! वे ‘मूर्खों के शहर’ जा रहे हैं, ताकि पुलिस के कुत्ते किराए पर लें. हो गया, और हम गए काम से!”
खरगोश उदास हो गया. उसने पंजों में नाक घुसा ली और कान लटका लिए.
मैंने उसकी विनती की, मैं रो रहा था, मैं उसके पैरों पर भी झुका. खरगोश टस से मस नहीं हुआ.
मगर जब शहर से दो चपटी नाक वाले बुलडॉग, जिनके दायें पंजों पर काली पट्टियां बंधी थीं, भागते हुए आए, तो खरगोश की पूरी काया थरथरा गई , - मैं मुश्किल से उछलकर उसकी पीठ पर बैठ गया, और वह बेतहाशा जंगल में भागने लगा...
बाकी तो तुम देख ही चुके हो, बुरातिनो.”
प्येरो ने अपनी कहानी ख़त्म की, और बुरातिनो ने उससे सावधानी से पूछा:
“और किस घर में, सीढ़ियों के नीचे किस कमरे में वह छोटा सा दरवाज़ा है, जिसे चाबी खोलती है?”
“कराबास बराबास इस बारे में नहीं बता पाया...आह, क्या हमें इससे कोई फरक पड़ता है, - चाबी तालाब के तल पर है...हम कभी भी सुख नहीं देख पायेंगे...”
“और क्या तुमने ये देखा है?” बुरातिनो उसके कान में चीखा. और जेब से चाबी निकालकर प्येरो की नाक के सामने नचाई. – “ये रही चाबी!”
बुरातिनो और प्येरो मल्वीना के पास आये, मगर उन्हें मल्वीना और कुत्ते अर्तेमोन के साथ भागना पड़ता है.
जब सूरज पर्वत के चट्टानी शिखर पर आया, तो बुरातिनो और प्येरो झाड़ी के नीचे से बाहर आये और खेत से होते हुए भागे, जिस पर कल रात को चमगादड़ बुरातिनो को नीले बालों वाली लड़की के घर से ‘मूर्खों के देस’ ले गया था.
प्येरो की ओर देखने से हंसी आ रही थी, - वह फ़ौरन मल्वीना को देखने के लिए उतावला हो रहा था.
“सुनो,” वह हर पंद्रह सेकण्ड बाद पूछता, “बुरातिनो, क्या वह मुझे देखकर खुश होगी?”
“मुझे क्या मालूम...”
पंद्रह सेकण्ड बाद फिर पूछता है:
“सुनो, बुरातिनो, और अगर उसे खुशी न हुई तो?”
“मुझे क्या मालूम...”
आखिरकार उन्हें सफ़ेद घर दिखाई दिया, जिसके दरवाजों पर सूरज, चाँद औए सितारे बने हुए थे.
चिमनी से धुँआ निकल रहा था. उसके ऊपर एक छोटा सा, बिल्ली के सिर जैसा बादल तैर रहा था.
कुत्ता अर्तेमोन पोर्च पर बैठा था और रह रहकर बादल की तरफ़ देखकर भौंक रहा था.
बुरातिनो का नीले बालों वाली लड़की के पास लौटने का ज़रा भी मन नहीं था. मगर वह भूखा था और दूर से ही उबले हुए दूध की गंध सूंघ रहा था.
“अगर लड़की फिर से हमें पढ़ाने का निश्चय करे, तो दूध पी लेंगे, - और मैं किसी भी कीमत पर यहाँ नहीं रुकूंगा.”
इसी समय मल्वीना घर से बाहर आई. उसके एक हाथ में चीनी मिट्टी का कॉफी पॉट था और दूसरे में – कुकीज़ की डलिया.
अभी तक उसकी आखें रोई हुई लग रही थीं, - उसे यकीन था कि चूहे बुरातिनो को कोठरी से खीचकर ले गए और उसे खा गए थे.
वह रेत की पगडंडी पर गुड़ियों की मेज़ पर बैठी ही थी, कि नीले फूल हिलने लगे, उनके ऊपर सफ़ेद और पीली पत्तियों की तरह तितलियाँ उड़ने लगीं, और बुरातिनो और प्येरो प्रकट हुए.
मल्वीना ने अपनी आंखें इतनी चौड़ी खोलीं कि दोनों लकड़ी के लडके आराम से उनमें उछल सकते थे.
मल्वीना को देखते ही प्येरो अनाप-शनाप बडबडाने लगा, उसके शब्द इतने असंबद्ध और बेवकूफ़ी भरे थे, कि हम उन्हें यहाँ नहीं बताएंगे.
बुरातिनो ने इस तरह कहा, मानो कुछ हुआ ही न हो:
“ये, लो, मैं इसे ले आया, - इसे संभालो...”
मल्वीना आखिरकार समझ गई कि ये सपना नहीं है.
“आह, कैसी खुशी है!” वह फुसफुसाई, मगर फौरन बड़ों जैसी आवाज़ में आगे बोली: - “बच्चों, फौरन जाकर नहाओ और दांत साफ़ करो. अर्तेमोन, बच्चों को कुंए पर ले जाओ.”
“तूने देखा,” बुरातिनो बडबडाया, “उसके दिमाग़ में पागलपन है – नहाना, दांत साफ़ करना! दुनिया में हर कोई सफ़ाई से ही रहता है...”
फिर भी वे नहाए. अर्तेमोन ने अपनी पूंछ के पीछे बंधे हुए ब्रश से उनके जैकेट साफ़ किए...
मेज़ पर बैठे. बुरातिनो दोनों गालों में खाना भर रहा था. प्येरो ने केक का एक टुकड़ा भी नहीं चखा था; वह मल्वीना की तरफ़ ऐसे देख रहा था, जैसे वह बादाम के आटे से बनी हो. आखिर वह इससे उकता गई.
“अरे,” उसने उससे कहा, “आपने मेरे चेहरे पर ऐसा क्या देख लिया? शान्ति से नाश्ता कीजिए, प्लीज़.”
“मल्वीना,” प्येरो ने जवाब दिया, “मैं काफ़ी समय से कुछ भी नहीं खा रहा हूँ, मैं कवितायेँ रचता हूँ...”
बुरातिनो हंसी से थरथराने लगा.
मल्वीना को आश्चर्य हुआ और उसने फिर से आंखें पूरी खोल दीं.
“तो – अपनी कवितायेँ पढ़िए.”
अपने सुन्दर हाथ से उसने गाल पोंछा और अपनी ख़ूबसूरत आंखें बादल की ओर उठाईं, जो बिल्ली के सिर जैसा था.
प्येरो ने इस तरह बिसूरते हुए कविता पढ़ना शुरू किया, जैसे वह गहरे कुएं के तल पर हो:
मल्वीना भाग गई पराए देस
मल्वीना खो गयी, दुल्हन मेरी...
बिसूरता हूँ, नहीं जानता – कहाँ जाऊं...
क्या अलबिदा कहूं, गुड़ियों की ज़िंदगी को?”
प्येरो पूरा पढ़ भी नहीं पाया, मल्वीना कविता की तारीफ़ भी नहीं कर पाई, जो उसे बहुत अच्छी लगी थी, कि रेत की पगडंडी पर भौंरा प्रकट हुआ.
भयानक रूप से आंखें बाहर निकाल कर उसने बताया;
“आज रात को पागल कछुए तर्तीला ने कराबास बराबास को सुनहरी चाबी के बारे में सब कुछ बताया...”
मल्वीना भय से चिल्लाई, हांलाकि वह कुछ भी नहीं समझ पाई थी. सभी कवियों की तरह भुलक्कड़ प्येरो ने कुछ बेमतलब उद्गार प्रकट किये, जिन्हें हम यहाँ नहीं बताएँगे. मगर बुरातिनो फौरन उछला और उसने अपनी जेबों में बिस्कुट, शकर और मिठाई ठूंसना शुरू कर दिया.
“जितनी जल्दी हो, यहाँ से भाग जायेंगे. अगर पुलिस के कुत्ते कराबास बराबास को यहाँ ले आये – तो समझो हम मर गए.”
मल्वीना का चेहरा बदरंग हो गया, सफ़ेद तितली के पंख की तरह. प्येरो ने सोचा कि वह मर रही है, उस पर कॉफी पॉट गिरा दिया, और मल्वीना की बढ़िया ड्रेस पर कोको से ढँक गयी.
ज़ोर से भौंकते हुए उछलकर अर्तेमोन ने, - क्योंकि उसे ही तो मल्वीना की ड्रेस धोनी पड़ती थी, प्येरो की कॉलर पकड़ ली और उसे हिलाने लगा, जब तक कि प्येरो ने तुतलाते हुए कह नहीं दिया:
“बस, बहुत हो गया, प्लीज़...”
भौंरा आंखें फाड़े इस गड़बड़ को देखता रहा और उसने फिर कहा:
“कराबास बराबास पुलिस के कुत्तों के साथ पंद्रह मिनट में यहाँ पहुँच जाएगा.”
मल्वीना कपड़े बदलने के लिए भागी. प्येरो बदहवासी से अपने हाथ नचा रहा था और उसने स्वयं को पीछे से रेत की पगडंडी पर फेंकने की कोशिश की. अर्तेमोन घरेलू सामान की थैलियाँ खीँच रहा था. दरवाज़े धडाम-धडाम कर रहे थे. कबूतर झाड़ी पर बैठे, बदहवासी से चिल्लाए जा रहे थे, गोरैयों ने ज़मीन से ऊपर उड़ान भरी. आतंक बढाने के लिए उल्लू जंगलीपन से अटारी के ऊपर ठहाके लगा रहा था.
सिर्फ बुरातिनो ही परेशान नहीं था. उसने अर्तेमोन के ऊपर आवश्यक सामानों से भरे दो बैग लाद दिए. बैगों के ऊपर मल्वीना को बिठा दिया, जिसने बढ़िया सफ़र वाली ड्रेस पहनी थी. प्येरो को उसने कुत्ते की दुम पकड़े रहने का हुक्म दिया. खुद सामने खडा हो गया:
“घबराने की ज़रुरत नहीं है! चलो, भागें!”
जब वे – याने बुरातिनो, जो बहादुरी से कुत्ते के आगे आगे चल रहा था, मल्वीना, जो बैगों पर उछल रही थी, और पीछे पीछे प्येरो, जो सामान्य ज्ञान के बदले बेवकूफी भरी कविताओं से लबालब भरा था, - जब वे घनी घास से बाहर निकल कर एक समतल मैदान में आये, तो – जंगल से कराबास बराबास की उलझी हुई दाढ़ी दिखाई दी. उसने सूरज से बचने के लिए आंखों पर हथेली रखी थी और आसपास के नज़ारे को देख रहा था.
