भारतीय इतिहास के महान
भारतीय इतिहास के महान
इतिहास में तीन को 'द ग्रेट' कहा गया:
1. अलेक्जेंडर द ग्रेट
2. अशोका द ग्रेट*
3. अकबर द ग्रेट
इतिहासकारों ने इन्हें महान घोषित किया, उनके विषय में कुछ कहना शांत सरोवर में पत्थर फेंकने जैसा है, फिर भी सत्य का उद्घोष आवश्यक है।
1. अलेक्जेंडर द ग्रेट — आक्रांता, महान नहीं
अलेक्जेंडर विश्व-विजय के लक्ष्य से भारत पर आक्रांता बनकर आया। उसने सम्पूर्ण आर्यावर्त में ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिसके कारण उसे भारतीय इतिहास में महानता का दर्जा दिया जाए।
उसने और उसकी सेना ने हजारों-लाखों सैनिकों एवं नागरिकों का संहार किया।
यदि चंद्रगुप्त मौर्य जैसे साहसी, वीर, धीर, गंभीर महान देशभक्त योद्धा और विद्वान, दूरदर्शी, दृढ़-इरादे वाले आचार्य चाणक्य की जोड़ी ने भारत को सांस्कृतिक, धार्मिक, सामरिक और आर्थिक दृष्टि से एक सूत्र में पिरोने का प्राणपण से प्रयास न किया होता, और सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस को अपनी पुत्री के विवाह सहित संधि के लिए विवश न किया होता — तो वर्तमान भारत का अस्तित्व ही शेष न रहता।
कहा जाता है सिकंदर पर अपने गुरु अरस्तु के कारण धार्मिक मूल्यों का प्रभाव था, और भारत प्रवास में भारतीय धर्म-दर्शन का उस पर प्रभाव पड़ा। यह कोई कारण नहीं हो सकता उसे भारतीय इतिहास का महान पुरुष घोषित करने के लिए।
2. अशोका द ग्रेट — गौरव भी, चेतावनी भी
सम्राट अशोक — जिनके साम्राज्य की सीमाएं सम्पूर्ण आर्यावर्त की वास्तविकता को प्रमाणित करती हैं — यह किसी भी भारतीय के लिए अभिमान और गौरव की बात है।
अशोक वीर, साहसी, दृढ़-निश्चयी, महान योद्धा के साथ-साथ विनम्र, प्रजापालक, न्यायप्रिय राजा थे। अपने दादा चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित मूल्यों और धरोहरों के धैर्यवान, गंभीर रक्षक थे।
पर कभी-कभी बड़े से बड़े व्यक्तित्व से भावनाओं के प्रवाह में ऐसी भूल हो जाती है जिसकी कीमत भविष्य को चुकानी पड़ती है। कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध दर्शन के गहरे प्रभाव में अशोक युद्ध से विरक्त होकर शांति और मानवता के प्रचार में समर्पित हो गए।
परिणाम:-
भारतीय युद्ध-योद्धा एवं रण-कौशल परम्परा शनै:-शनै: समाप्त होने लगी। आत्म-रक्षा और सीमा-रक्षा की जागृति अहिंसा सिद्धांत से लगभग समाप्त हो गई — जिसकी आधारशिला चाणक्य की प्रेरणा से चंद्रगुप्त मौर्य ने स्थापित की थी।
धर्म मानना व्यक्ति का अधिकार है, किन्तु सम्राट के प्रत्येक क्रियाकलाप का प्रभाव अतीत के मूल्यों, वर्तमान के परिवर्तन और भविष्य के सारगर्भित संदेश पर पड़ता है।
कलिंग के हृदय-परिवर्तन ने आम भारतीयों और रियासतों में युद्ध-शस्त्र की प्रवृत्ति लगभग समाप्त कर दी। प्रतिरोध की क्षमता समाप्त हो गई और भविष्य की प्रति-चिंता निर्मूल हो गई। परिणाम यह हुआ कि बाहरी आक्रांताओं ने जब चाहा भारत को रौंदा, लूटा — कहीं कोई संगठित प्रतिरोध नहीं हुआ।
पूज्य अटल जी ने बाबर और इब्राहिम लोदी के युद्ध के परिप्रेक्ष्य में इसी सत्य को उद्घोषित किया था।
अशोक के प्रभाव का परिणाम यह भी हुआ कि सैकड़ों वर्ष बाद दक्षिण के एक राजा ने नवपंथ इस्लाम को बिना भारत के गौरवशाली अतीत और भविष्य की दृष्टि के समझे मस्जिद निर्माण की अनुमति दे दी जिसका परिणाम आज भारत अपने बंटवारे के टुकड़ों की असह वेदना के रूप में प्रतिदिन देख रहा है।
सबके बावजूद — अशोक महान थे और भारतीय इतिहास के लिए अभिमान हैं, निःसंदेह।
3. अकबर द ग्रेट — महानता की मर्यादा का हनन
अकबर को भारतीय इतिहास में महानता का दर्जा देकर महानता की मर्यादा का ही हनन किया गया है।
अकबर का जन्म तब हुआ जब बाबर द्वारा क्रूरता की पृष्ठभूमि पर मुगल साम्राज्य की बुनियाद रखी गई थी, जिसका उद्देश्य ही इस्लामिक सिद्धांतों का असीम ब्रह्मांड तक विस्तार था — जिसमें जनता नहीं, धर्म ही शासन का सिद्धांत था। हजारों मंदिर टूटे।
बाबर के बाद हुमायूं को जीवन बचाने के लिए छिपना-भागना पड़ा। उसी भय के वातावरण में अकबर का जन्म हुआ। वह पढ़-लिख नहीं सका। उसे इस्लाम के रीति-रिवाज तो पता थे पर उसकी आचरण में सिर्फ कुटिलता और क्रूरता नजर आती थी।
अकबर बाहर से सहिष्णु दिखता था, किन्तु मन से कठोर था। कम पढ़ा-लिखा होते हुए भी राजनीतिक रूप से बहुत चतुर था। वह जानता था कि किसी समाज पर शासन करने के लिए उस समाज से संबंध बनाना आवश्यक है।
इसीलिए उसने हिंदू समाज से रिश्ते-संबंध बनाए, दिखावे के लिए ही सही सम्मान दिया। बीरबल, टोडरमल, तानसेन, मान सिंह, शक्ति सिंह आदि को दरबार में स्थान दिया। इसी दूरदर्शिता से मुगल शासन की जड़ें भारत में गहरी हो गईं।
उसकी दूरदृष्टि और भी खतरनाक थी — जिस धर्म-आचरण के कारण बाबर ने हजारों मंदिर तोड़े, हिंदुओं की उस पीड़ा और घाव को ही समूल समाप्त कर दिया जाए। इसी सोच से उसने *दीन-ए-इलाही* की स्थापना की। दुर्भाग्य से इसे इस्लामिक समाज ने ही स्वीकार नहीं किया उन्हें तलवार और क्रूरता पर अधिक भरोसा था।
तो क्या यह विषय वर्तमान और अतीत के परिप्रेक्ष्य में विचारणीय नहीं है कि अकबर भारतीय इतिहास के लिए महान और भारतीयों के लिए आदर्श क्यों?
निष्कर्ष — प्रश्न समस्त भारतीयों के समक्ष
क्या अशोक महान के अतिरिक्त सिकंदर और अकबर भारतीय इतिहास के प्रेरणा-स्रोत और महान सम्मान के अधिकारी हो सकते हैं?
यह प्रश्न प्रत्येक भारतीय के लिए विचारणीय है।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
