परिवर्तन के पथ
परिवर्तन के पथ
परिवर्तन के पथ (काव्य संग्रह ) - डॉ भारतेन्द्र सिंह विनम्र सौम्य एवं सार्थक सोच विचार एवं व्यवहार के व्यक्ति के साथ साथ सारगर्भित व्यक्तित्व के धनी है हिंदी साहित्य मे उनकी गहरी रूचि एवं कृतित्व इस सत्यार्थ कि प्रमाणिता के साथ साथ प्रमाणिकता परिभाषित करती है! परिवर्तन के पथ (काव्य संग्रह ) भारतेंद्र सिंह जी द्वारा ऐसी कृति है जिसके द्वारा उन्होंने अपने जीवन अनुभवों एवं अनुभूतियों को एक सुंदर प्रभावी माला के रूप में समय समाज एवं साहित्यिक सांसर को प्रेषित प्रस्तुत किया है जो दृष्टि दिशा दृष्टिकोण प्रदान करते हुए आत्म बोध चिंतन से व्यावहारिक संस्कार के आचरण को प्रेरित करती है! 1- परिवर्तन के पथ (काव्य संग्रह ) माँ शारदे कि वंदना,से शुभारम्भ होकर सहयोग, संघर्ष, अब उनकी अकड़पन को मिटाकर लौट आए, आज अपनों में अपने नहीं ऱह गए से लेकर इंतजार,गंगा कि अविरल धारा,बेटियां, बाल मजदूर, क्या कहता है गणपति स्वरूप, माँ कि महिमा, चलो मिल देश का नाम बढ़ाए, भारत माता अभिनन्दन तक कुल एकसठ रचनाए भिन्न भिन्न शीर्षक विषयों पर है जो मानव जीवन समाज का पथ प्रदर्शन करती है!! 2- भाषा शैली एवं शब्दों का चयन - डॉ भारतेंद्र जी द्वारा सभी रचनाए मुक्त छंद शैली में लिखी गई है शब्दों का चयन एवं संयोजन समायोजन बहुत बारीकी एवं सुंदर ढंग से साहित्यिक शैली एवं शिल्प में किया गया है जो सराहनीय तो है ही अतुलनीय अनुकरणीय एवं सराहनीय है!! 3- साहित्यिक दृष्टिकोण से - परिवर्तन का पथ (काव्य संग्रह ) हिंदी साहित्य कि दृष्टिकोण से एक व्यवहारिक आचरण के आमंत्रण का बोध कराती समाज को अतीत के अभिमान के साथ वर्तमान से सशक्त सकारात्मक एवं प्रेरणा श्रोत कलजयी कृति है जो स्वर्णिम भविष्य का आवाहन है तो वर्तमान मे संस्कार संस्कृति का आवाहन है! 4- प्रकशन कि दृष्टि से ---- श्री दीप प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ भारतेंद्र सिंह जी द्वारा रचित काव्य संग्रह आकर्षक एवं पाठकों को प्रभावित करता है निश्चिंत रूप से पुस्तक का प्रकाशन उच्च गुणवत्ता के साथ करने का प्रकाशक द्वारा पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से किया गया है एक कमी प्रतीत होती है डॉ भारतेंद्र सिंह जी का साहित्यिक जीवन परिचय नहीं है जो होना चाहिए कुल मिलाकर प्रकाशन उत्कृष्ट है! 4- परिवर्तन पथ (काव्य संग्रह ) का पाठको पर प्रभाव -- डॉ भारतेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत कृति परिवर्तन पथ (काव्य संग्रह ) पाठको को नीति नियत को वर्तमान परिवेश में आत्म चिंतन मंथन को आमंत्रित करती उनके व्यक्तिगत जीवन मेंसमय समाज राष्ट्र के प्रति कर्तव्य दायित्व कि अनुभूति कराते हुए उन्हें उनके दायित्व का बोध कराती समय समाज को जागरूक करती कलजयी कृति है के साथ साथ आत्मीक चेतना जागरण का शाश्वत नित्य निरंतर शांखनाद है जैसा कि पुस्तक का शीर्षक है तदानुसार पाठकों पर प्रभाव छोड़ती है जो नकारात्मकता का का त्याग करने को पुकारती है तो सकारात्मक सार्थक चेतना संस्कृत के निर्मल निश्चिंल अविरल प्रवाह का आमंत्रण देती है!! नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!
