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Aanchal Rathour

Inspirational

4.5  

Aanchal Rathour

Inspirational

बाइक रेस विथ लकी चार्म

बाइक रेस विथ लकी चार्म

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एक मध्यम आकार का व्यवस्थित कमरा जिसमें जगह जगह बाइक के पोस्टर लगे हुए थे। कमरें में बना हुआ शोकेस ट्रॉफियों से खचाखच भरा हुआ था। एक छोटी सी अलमारी में तरह तरह की बाइक के छोटे नमूने रखे हुए थे।

कमरें में एक मध्यम आकार की मेज के ऊपर बाइक और रेस से जुड़ी हुई मैगजीन, किताब रखी हुई थी। कमरें के कोने में गोल आकार का एक बेड पड़ा हुआ था जिसके ऊपर लगभग तेईस साल का एक युवक बैठा हुआ था। उसने अपने चेहरे को दोनों हाथों से छिपाया हुआ था। वह खुद में ही खोया हुआ था।

युवक हष्ठ पुष्ठ शरीर का मालिक था। अचानक से उसकी सिसकियों की आवाज सुनाई देने लगी और फिर आवाज धीरे धीरे बढ़ने लगी। उसका दुःख आंसू बनकर बाहर निकल पाता उससे पहले ही उसे कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज सुनाई दी।

“कब तक ऐसे ही रहने का इरादा है?” एक पचास साल की महिला ने अंदर आते हुए पूछा। महिला की आवाज बड़ी ही शांत थी।

“मम्म...मम्मी!” युवक ने अपना चेहरा ऊपर उठाते हुए कहा।

“राज बेटा! क्या तुम अभी तक भी उस बाइक के बारे में ही सोच रहे हो.?” महिला ने पूछा और राज के पास चली गई।

“आपको तो मालूम ही है कुछ दिनों बाद मेरी एक बाइक रेस है।” राज ने रुआंसी आवाज में बताया।

“तुम्हारे लिए कौन सा बड़ी बात है?” महिला ने पूछा और फिर मुस्कुरा दी।

“प्रतियोगिता से मुझे कोई परेशानी नही है। पर मेरी बाइक मेरे पास नहीं है। वह मेरे लिए बहुत ज्यादा लकी थी। मै उसके बिना ये रेस कैसे जीतूंगा? आज तक सारी रेस मैने उसी बाइक की वजह से ही तो जीती है।” राज ने एक ही सांस में अपनी बात कह डाली।

“ये कोई बड़ी बात नहीं है। अपनी दूसरी बाइक से प्रतियोगिता में भाग ले लेना।” महिला ने सुझाव दिया और फिर आगे बोली। “काबिलियत बाइक में नही उसे चलाने वाले में होती है। तुमने इससे पहले भी कई बाइक स्टंट रेस में हिस्सा लिया हुआ है और तुम उन्हें जीते भी थे। उनके सामने तो ये कुछ भी नही।”

“पर सभी रेस उस बाइक की वजह से ही जीती थी।” राज ने संक्षिप्त सा जवाब दिया।

महिला की समझ में आ गया था कि राज इतनी आसानी से उसकी बात नही मानने वाला था। 

“मेरी बात को ध्यान से सुनना और समझना। महिला ने कहा और फिर आगे बोली। “बाइक चोरी हुई थी ना!”

“हां।” राज ने हामी में गर्दन हिलाई और आगे बोला। “और जब मिली उसकी हालत बहुत ही ज्यादा बुरी थी।”

“उसे ढूंढने के लिए तुमने दिन रात एक कर दी।” महिला ने कहा और फिर आगे बोली। “मुझे मालूम है तुम अपनी उस बाइक को बच्चे की तरह रखते थे। पर सोचो जिस हालत में वह मिली उससे साफ पता चलता है कि किसी ने वो सब जान बूझकर किया था।”

“ये तो मैंने सोचा ही नहीं।” राज ने जवाब दिया। उसकी चेतना अब धीरे धीरे लौट रही थी।

“सोचो अगर वे लोग तुम्हारे साथ कुछ कर देते। बाइक की वजह से ही तुम्हारी जान बची है। लकी तो वह बाइक तुम्हारे लिए बहुत ज्यादा थी।” महिला ने कहा और फिर आगे बोली। “रेस में हिस्सा ना लेकर तुम यही साबित करोगे कि तुम उनसे डर गए हो और इसी वजह से पीछे हट गए।”

“भला मै क्यों डरूंगा उनसे?” राज ने तमतमाते हुए कहा। “पर मेरी बाइक..” उसने सोचते हुए बड़ी धीमी आवाज में यह बात कही। पर महिला को उसकी आवाज सुन गई थी।

“तुम्हें पता है कि तुम्हारे पापा की डेथ बाइक रेस हुई थी।” महिला ने राज के ऊपर धमाका करते हुए कहा।

“क्या.?” राज के मुंह से बस इतना ही निकला था। वह अविश्वास के साथ आगे बोला। “पर आपने तो बताया था कि उनकी डेथ एक्सीडेंट में हुई थी।”

“एक्सीडेंट में ही हुई थी। पर वो एक्सीडेंट बाइक रेस के दौरान हुआ था।” महिला ने बताया और आगे बोली। “उस वक्त तुम बस तीन साल के थे।” महिला के लिए उस घटना को दोबारा से याद करना बड़ा मुश्किल भरा था। वह उस हादसे को कभी भुला नही पाई थी। 

“मम्मी!” राज ने इतना कहते हुए अपना एक हाथ महिला के कंधे पर रख दिया।

“क्या हुआ?” महिला ने अपनी यादों से बाहर आते हुए पूछा।

“आपको क्या हुआ?” राज ने पहली बार अपनी मम्मी को इतना ज्यादा दुःखी देखा था। आज उसे समझ आया था कि राज की मम्मी उसी की वजह से खुश रहती थी या फिर खुश रहने का दिखावा करती थी। साथ ही साथ उसे अपनी मम्मी के जरूरत से ज्यादा शांत रहने का कारण भी लगभग समझ आ रहा था। उनकी प्रकृति ही ऐसी है सोच कर उसने कभी अपनी मम्मी के ऊपर इतना ध्यान नही दिया था। पर आज उसे लगभग सब कुछ समझ आ रहा था।

“आज तुम्हें उस दिन की सारी बातें बताऊंगी।” महिला ने कहा और अपनी पुरानी यादों में खो गई।

“सुनिए।” सत्ताईस साल की एक महिला ने अपने पति को आवाज लगाते हुए कहा।

“बोलो।” उसके पति ने जवाब दिया।

“आज मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा। आप आज रेस में मत जाइए।” महिला ने अपने मन की बात कही।

“तुम थक गई होगी इसलिए ऐसा लग रहा होगा।” उसके पति ने समझाया।

“नही! आज आप रहने दीजिए।” महिला ने कहा।

थोड़ी देर दोनों में बातचीत होती रही। आखिर में महिला ने अपने पति की बात मान ली। 

बाइक रेस शुरू हो चुकी थी। उस वक्त बाइक रेस का ज्यादा क्रेज नही था जितना इस वक्त है। बावजूद इसके राज के पापा ने कम ही वक्त में लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली थी। रेस की शुरूवात में सब कुछ सही रहा। पर जब वह रेस जीतने वाला था तभी दो तीन रेसर ने उसे घेर लिया और लगातार उसकी बाइक में जोरदार कई टक्कर मारी। ऐसा लगा कि वे अपनी दुश्मनी निकाल रहे थे। सभी को लगा कि वह उठ जाएगा पर वह नहीं उठा।

रेस से जुड़े हुए लोग सीधा वहां पर पहुंच गए। उन्होंने देखा तो पाया कि उसकी सांसें रुक चुकी थी। इसी के साथ महिला की पूरी दुनियां बिखर गई। वहां की हालत को समझते हुए वह राज को गोद में लेकर भागते हुए सीधा ट्रैक पर आ गई। वह फूट फूट कर रोना चाहती थी। पर रो भी नही पाई। उसके शरीर को ससम्मान वहां से उठाया गया। चारों रेसर को पकड़ कर जेल में डाल दिया गया और उनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया। फोरेंसिक जांच के लिए महिला ने मना कर दी। घरवालों को वही पर बुला लिया गया। फैंस की इच्छा को ध्यान में रखते हुए सभी ने मिलकर ससम्मान उसका अंतिम संस्कार वही पर ही कर दिया।

बाइक रेस को रद्द कर दिया गया। किसी को कोई फायदा नही हुआ। सट्टेबाज सिर्फ एक्सीडेंट कराना चाहते थे पर जो हुआ उसकी किसी ने भी उम्मीद नही की थी। 

लोगों की मांग को देखते हुए स्टैटिडम का नाम बदल कर राजेश स्टेडियम रख दिया गया और किन्ही कारणों की वजह से वह बाद में बंद कर दिया गया। महिला को इनाम की धनराशि दे दी गई और सब कुछ शांत होने के लगभग एक महीने बाद वह शहर छोड़ कर दूसरे शहर में जा कर बस गई। शहर और उसकी यादों से कोशों दूर।

महिला की आँखें नम थी। राज की आंखें महिला के चेहरे पर थमी हुई थी।

“इसलिए मैने तुझे बचपन से ही बाइक रेस से दूर रखा था।” महिला ने बताया।

“इसी वजह से आपने मुझे कभी ये नही बताया कि पापा बाइक रेसर थे।” राज ने अपने मन की बात कही।

“हां! उनके जाने के बाद मुझे बाइक रेसिंग से नफरत हो गई थी।” महिला ने बताया और फिर आगे बोली। “मै भूल गई थी कि बाइक रेसिंग के लिए जुनून तुम्हारे खून में ही है।”

“मम्मी! मुझे माफ करना। ना जाने मैने बाइक रेस को लेकर आपको क्या क्या नही कहा।” राज को अब पुराने समय में कहे हुए अपने शब्दों के लिए दुःख हो रहा था।

“कोई बात नही। मेरी भी गलती थी। तुम्हें सही वजह थोड़े ही पता थी।” महिला ने कहा और फिर आगे बोली। “अब तो बाइक रेस में हिस्सा लोगे ना?”

“हां। बिल्कुल लूंगा।” राज ने उत्साहित होकर जवाब दिया।

“बढ़िया बात है।” महिला ने कहा और फिर आगे बोली। “तुम युवाओं के लिए आईडल हो। अगर तुम हार मान लेते तो उससे उनके ऊपर क्या असर होता? तुम रेस में हिस्सा लेना और लोगों को बताना कि जिंदगी लकी चार्म से नही मेहनत और लगन से चलती है।” महिला ने कम शब्दों में ही अपनी बात राज को समझा दी थी।

महिला की बातों से राह में जोश आ गया था। वह जोशीले अंदाज में बोला। “भाग भी लूंगा और रेस भी जीतूंगा।”

“ये हुई ना खिलाड़ियों वाली बात।” कहकर महिला ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फिरा दिया।

“अब मै खाना बना लूं।” महिला ने कहा और वहां से चली गई। राज आने वाली बाइक रेस की तैयारी में जुट गया।


पूरा स्टेडियम लोगों से खचाखच भरा हुआ था। बाइक रेस में लोगों का आना आम बात थी। पर आज जरूरत से ज्यादा भीड़ थी। भीड़ होती भी क्यों नहीं आखिरकार आज उनका पसंदिदा रेसर रेस में हिस्सा जो ले रहा था। एक एक करके सभी रेसर एक लाइन में आकर खड़े हो गए और तब तक खड़े रहे जब तक उन्हें पिस्टल की आवाज सुनाई ना दी। आवाज के साथ ही रेस शुरू हो गई। भाग लेने वाला प्रत्येक रेसर जीतना चाहता था। कभी कोई आगे जाता तो कभी कोई। कुछ देर तक ये सिलसिला जारी रहा। लेकिन राज शुरू से ही सबसे आगे था।

स्टेडियम में बैठी हुई राज की मम्मी को अचानक ही कुछ याद आया और वह मन ही मन प्रार्थना करने लगी। “आज तो वही दिन है जिस दिन राज के पापा का एक्सीडेंट हुआ था। हे भगवान मेरे बेटे की रक्षा करना।” तभी उसे एकाउंसमेंट ने राज का नाम सुनाई दिया और वह दोबारा फिर से रेस देखने लगी।

अगले ही पल उसके साथ साथ बाकि सभी लोगों की आंखें खुली की खुली रह गई। दो तीन बाइक राइडर शुरुवात से ही राज ने पीछे पड़े हुए थे। उनमें से एक ने राज की बाइक को बड़े जोर से टक्कर मार दी थी और खुद आगे निकल गया। टक्कर की वजह से राज अपना संतुलन खो बैठा और उसकी बाइक किनारे जा लगी। पूरी सुरक्षा के बावजूद भी राज को जगह जगह चोट लग गई थी। 

उसने उठने की कोशिश की पर वह नहीं उठ पाया। फैंस राज की हालत देखकर उदास हो गए। भीड़ में बैठी हुई उसकी मां ने जोर जोर से चिल्लाना शुरू किया। “राज तुम उठ सकते हो। हार मत मानना।” इसी के साथ पूरा स्टेडियम इसी आवाज से गूंज उठा।

इन आवाजों से एक तरफ जहां राज को हौसला मिल रहा था दूसरी तरफ बाकि खिलाड़ियों का मनोबल टूट रहा था। राज ने हिम्मत करके पहले खुद को खड़ा किया और फिर बाइक को खड़ा किया। अब बाइक के ऊपर बैठ गया। उसने हैंडल को कस कर पकड़ा और दोबारा फिर से दौड़ पड़ा। उसकी स्पीड इतनी ज्यादा थी कि ऐसा लग रहा था मानो वह हवा से बात का रहा हो। बाकि रेसर को पहले ही पता लग गया कि वे हारने वाले है।

राज के दोबारा खड़े होने की वजह से ना जाने कितने लोगों के दिल टूटे थे और बहुत लोग कंगाल होने वाले थे। सट्टेबाजों ने अपने लालच के चलते राज के पापा का एक्सीडेंट करा दिया था और अब राज की बाइक की चोरी के साथ उसको मारने की प्लानिंग थी। इसका मुख्य कारण था कि उन्होंने राज को लालच भी दिया पर उसने साफ मना कर दी।

जुनून और लगन तो रेस में भाग लेने वाले हर रेसर के पास थी। पर राज के साथ फैंस का प्यार और बड़ों का आशीर्वाद था और इसी के चलते आखिरकार वह रेस जीत गया। दोबारा फिर से पूरा स्टेडियम लोगों की आवाज से गूंज उठा।

घोषणा के मुताबिक रेस जीतने वाले को कावस्की निंजा Z250 के साथ एक लाख का चेक मिलने वाला था। इनाम की बाइक राज की पसंदिदा थी। इनाम के लालच में इस रेस के लोगों ने ना जाने क्या क्या नही किया। पर आखिर में वही हुआ जो सही था।

फैंस अपने स्टार की आवाज सुनने को बेताब थे। राज ने माइक पकड़ा और बोलना शुरू किया। “जिंदगी में कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है। पुरानी चीजों को कभी भी पकड़कर नही रखना चाहिए। मंजिल पाने के लिए लकी चार्म नही मेहनत और लगन काम आती है।”

राज ने लगभग दस मिनट तक भाषण दिया। उसकी बातों को सभी बड़े ध्यान से सुन रहे थे।

“इन सबका क्रेडिट मेरी मम्मी और आप सभी को जाता है। इसके आगे सब कुछ फेल है। सबसे जरूरी सूचना मै अपने बाइक रेसर पिता के नाम पर बने हुए बाइक स्टेटियम राजेश स्टेडियम जोकि बहुत दिनों से बंद है उसको दोबारा शुरू करूंगा ” इन्ही शब्दों के साथ राज ने अपनी बात को विराम दिया।

सभी को राज पर गर्व हो रहा था। कुछ दिनों बाद राज की मदद से सट्टेबाजों को पकड़ कर जेल में भेज दिया गया। राज ने स्टेडियम को चलाने के लिए दिन रात एक कर दी। उसकी कोशिशों की वजह से ही उसे स्टंट बाइक बाइक रेस स्टेडियम बना दिया गया। 

समाप्त 



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