STORYMIRROR

अपने देश की पहचान

अपने देश की पहचान

3 mins
1.1K


आर्यावर्त ,हिंदुस्तान भारत , इंडिया, कई नाम हैं इस देश के। और न जाने कितने रंग , कितने संस्कृति बसी हुयी है इस देश में. जितना विशाल इस देश का छेत्रफल है उससे भी विशाल इस देश का हृदय है. सच में कभी कभी सोचता हूँ की कमाई कौन हूँ ,भारतीय कौन है। हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई ,पारसी ,अरेबियन ,अफगानी , कौन, आखिर कौन।

इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए मैंने भारत छोड़ दिया और एक अनजान सफर पर निकल गया , ये देखने की आखिर एक भारतीय की पहचान है क्या?

और दोस्तों मैं पहुँच एक अनजाने से शहर में। जहाँ न तो कोई मेरा पहचान वाला है और न ही कोई मेरा मुझे जानने वाला। वहां पर मैंने अपने लिए एक रूम बुक कराया और मैं अपने जरूरी सामान के साथ वह पहुँच गया यूक्रेन की राजधानी कीव.

एक दिन मैं वहां के बाजार में घूमें पहुँचा , वहां पर ठंडी काफी थी सो मैंने जैकेट ,जुटे और सर्दी वाली टोपी पहन रखी थी। मैं वहां के लोकल मार्किट में घूमने लगा और देखा की वहां कई तरह के सब्जी, फल , मीट ,और ब्रेड के दूकान लगे हुए थे। कई जगह कॉफी शॉप थे जो की कॉफी के अलावा केक और ब्रेड भी बेच रहे थे . इसके अलावा कुछ शॉप जहाँ की डोनर कबाब भी बिक रहे थे। एक दुकान जो की कई तरह के मीट बेच रहे थे। और भी तरह के दुकान थे जैसे कपड़े की दूकान , बाल काटने के सलून, मेडिकल शॉप ,कपड़ो की दूकान , खिलौने की दुकान और कई बड़े शॉपिंग मॉल थे जो तरह तरह की चीजे बेच रहे थे.

इसी तरह मैं घूमते घूमते चला जा रहा था और दुकानों की चीजों को देखता जा रहा था।

अचानक मुझे एक दुकान दिखी ,जहाँ की काजू ,बादाम ,मेवे ,पिस्ता ,खजूर , मुगफली ,चना और भी न जाने क्या क्या , सभी मुझे जाने पहचाने सामान लगे। और वो दूकान देख कर मै वही रुक गया , थोड़ी देर तक मैं वहीँ बाहर रुका रहा और दुकान के सामान को देखता रहा।

तभी मुझे आवाज सुनाई दिया सलाम वालेकुम , मैंने देखा दुकान वाला मुझसे ही बोल रहा था , भी सलाम बोलकर उसकी ओर बढ़ चला। मैं दुकान के अंदर पहुँचा और दुकानदार से सलाम बोला। दुकानदार ने मुझसे पूछा हिन्दुस्तानी , मैं भी मुस्कुराते हुए बोलै हाँ। और आप कहाँ से हो, तब दुकानदार ने कहा की मैं कज़ाकिस्तान से हूँ , मैंने बोलै आप हिन्दुस्तानी भाषा जानते हो , पर वह बोला नो , नहीं। मैंने गौर से दूकान को देखा वहां पर कई तरह के डॉयफ्रुइट्स थे , इसी प्रकार के डॉयफ्रुइट्स की दुकाने मैंने भारत में भी कई जगह देखी हैं इसीलिए मुझे वो कुछ जानी पहचानी लग रही थी। मैंने वहां से कुछ मूंगफली खरीदी और पैसे दिए , फिर उसे सलाम करके में वहां से निकल गया।

और वहां से आगे बढ़ा तो अगले हो दुकान पे मुझे एक और शख्स मिला जो मुझे देखकर ख़ुशी से सलाम वालेकुम बोलकर मेरा हाथ पकड़कर रोकने लगा , मैं ने भी मुस्कराकर सलाम बोला। ,और उसके पास जाकर रुका , उसने भी मुझसे वही बोला हिंदुस्तानी , मैंने मुस्कराकर बोलै हाँ। और फिर इशारा करके पूछा की आप कहाँ से हो ? तो उसने बताया की चेचेन्या से है।

वाह क्या बात है अभी अभी मुझे दो व्यक्ति मिले जो की विदेशी धरती पर अलग अलग मुल्को से आये हुए हैं , लेकिन मेरे लिए गर्व की बात है की वो मेरे देश भारत को जानते और मुझे उस देश का नागरिक होने की वजह से मेर्री इज्जत करते है।

तो चाहे हम अपने विशाल देश में कई प्रांतो और भाषाओ की बिभिन्नता लिए हुए है जो की हमें कहीं न कहीं विश्व की कई संस्कृतियों का अंश से मिला है जो की पूरे विश्व में हमें पहचान दिलाता है।

इस बात के मुझे अपने देश पर गर्व है।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Inspirational