अच्छा सबक
अच्छा सबक
यह बात उन दिनों की है, जब मै और मेरी सहेलिया रिया, रती, वर्षा ,छाया और प्रिया अध्यापक कॉलेज में पढा करती थी।अध्यापक की पढाई करने के लिये हम सब सहेलियो को अपने गाव से शहर रोज बस से आनाजाना करना पडता था। बस से यात्रा करते समय हमे बहूत ही कठिनाई यो से गुजरना पडा। कभी बस लेट हो जाती तो कभी हम लेट हो जाते। कभी कभी तो बस मे खडे होने की भी जगा नही होती थी। इतनी भींड होती थी।की ,इस भींड का फायदा जवान लोंगं तो छोडो बडे ,बूठे आदमी भी उठा ते थे। शरम आने वाली हरकते करते थे। कभी कभी तो हमें चार चार घंटे बस की राह ताखते बस स्टॉप पे बैठे रहना पडता। जब हम सब बस स्टॉप पर बैठे रहते थे तब वहॉ के आवारा लडके हम सब लडकी यो को देख शिटी बजाना टॉन्ट मारना ,गंदे गंदे गाना गाना। छोटे छोटे पत्थर फेकना ,कागज के तुकडे फेक कर मारना,चॉकलेट फेक के मारना ऐसी गंदी गंदी हरकते करते थे। हम सबको इतना गुस्सा आता था कि, हम उनकी तरफ बडी बडी आँखे किया करती थी और मनही मन गाली भी देते थे। कॉलेज का पहिला साल था और हम कॉलेज में नये थे। इसलिये हमसब कुछ नही कर रहे थे। पर कॉलेज के दुसरे सालसे हम सब ने जो भी हमे परेशान करता था, उसे सबक सिखाना चालू कर दिया। फिर वह लडका हो, आदमी हो, या बूढा। किसी को भी नही छोडते थे। हमसब सहेलियोसें उलझने वालो की खैर नही थी। रिना तो ऐसी थी की,अगर कोई लडका ,या आदमी हमें से किसीको मूडके देखता तो वह अपने सुरीले आवाज से गाना गाना चालू करती और वह गाना था, मूड मूड के ना देख भडवी के.....इस गाणे के वजह से कोई हमे आँख उठाके देख ना भी चाहता हो , पर इस गाने की वजह से अॉख उठाके भी ना देख पाता।
हम सब सहेलिया बहूतही दिलमिजाज थी।सब एक से बढकर एक खूबसुरत और हुशार। सब के खुबसूर्ती का कोई जवाब ही नही था। सबके चेहरे मानो गुलाब की फुलो तरह हरवक्त खिले रहते थे। किसी केभी चेहरे पर कभी मायूसी दिखाई नही देती थी। बसमें हसी मजाक करते कॉलेज कैसे आ जाता पत्ताही नही चलता था। हमारी मौज मस्ती का वो माहोल आज भी दिल को सूकुन भरी यादो में ले जाता है। हमसब सहेलिया एकसात बस में गाणो की अंताक्षरी खेलते थे। जोर जोर से गाना गाते थे। इसवजह से कभी कभी कँडक्टर की डॉट भी खानी पडती थी। पर हमसब थोडेही किसीकी सुननेवाले थे।जब हमारा स्टॉप आता तबी हम शांत होते थे। तबतक हमे नाही किसीकी बात सुनाई देती, ना गाली। हम सब अपने ही धूंद मे मगन रहते थे।
कॉलेज ,पढाई सब अच्छा चल रहा था।
दिवाली के बाद हमारा इम्तिहान था। हम सब ने अपना इम्तिहान अच्छे तरीके से पुरा किया। ऐसे ही रोज बस से कॉलेज आना जाना चालू था। लेकिन एक दिन ऐसा हुआ की,हम सबको कुछ समजा ही नही। उस दिन बहुत बारिश चालु थी। हम सब बस स्टॉप पर बैठे गाव जाने वाली बस की राह देख रहे थे। हमारा पुरा ध्यान बस की तरफ था। तबी वर्षा ,धिरेसे सबको बोली ,वह आदमी कबसे हमारी तरफ गंदी नजर से देखे जा रहा है। रात के सात बजे थे ऊस समय बस स्टॅन्डपर लोंग भी बहूत कम थे। लेकिन तभी हमारी बस आ गई और हमसब बस की तरफ जाने निकले। तो वह आदमी मेरे सामने आके खडा हो गया और न जाने मुझे क्या हो गया। उसके तरफ देखते मै दोन मिनिटं तक एकही जगपर खडी रही।मानो मुझे उसने हिप्नोटाइज कर दिया हो। मुझे सब सहेलिया जोर जोर से आवाज दे रही थी।लेकीन मै वहा से हटीही नही। मै उसकी तरफ ही देख रही थी। एकदम से कोई मुझे खिचता हूआ ले गया ओर वो रिया थी।उसने मूझे छिचते हूये बस मे ले आई।सब मुझे देखकर हस रही थी। पर मुझे उन्हके हँसी का कारण कुछ समज नही आया। पर मूझे लगा,अगर उस दिन रिया मुझे लेने नही आती ,या मेरी बस छुट जाती। तो मेरा क्या होता। इस वजेसे कितने दिन तक मै उस बात को लेकर सोचती रही। वह आदमी रोज किसी ना किसी लडकी को गंदी हरकते करके परेशान करता था।
हम सब ने सोच लिया की बस अब हो गया। उस आदमी को अच्छेसे सबक सिखाना पडेगा। एक दिन बसमें बहुत भींड थी।हमसब जैसे ही बस मे चढें वह आदमी भी हमारे पिछे चढा। हम सब को देखते ही वह आदमी हमारे पीछे आया। हमने सोचा ही था की आज उसको अच्छा सबक सिखायेंगे। बहुत भींड के कारण सबको अपनी जगह से हिलना भी मुश्किल था। उसका फायदा हमे उठाना था। हम सब सहेलियो ने एक दुसरे को इशारा किया और सबने अपनी बँग से सेफ्टी पिन निकाली और एकएक करके सब उसे सेफ्टी पिन चुबाते रहे। वह आदमी वहा से हिल ही नही सकता था, ना चिल्ला सकता था।हम सब सहेलिया उसे चारों तरफ से घेरे खडी थी। हम रुके नही उसकी गल्तीओ की सजा उसे भुगतनिही थी। हम सेफ्टी पिन उसे चुबाते रहे।उसे दर्द तो बहुत हो रहा होगा। जैसे ही बस का पहिला स्टॉप आया वह जल्दी से उत्तर गया। और कभी भी फिरसे हमे ना बस स्टॉप दिखा ,ना, बस मे। जब तक हम डरते रहेंगे लोग हमे डराते रहेंगे। खुद को परेशानी से छुडाना खुद की जिम्मेदारी है। ये हम सब सहेलियों ने साबित किया।
