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Bgvs Bihar

Inspirational Children

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अभिशाप परिवार, वरदान बना

अभिशाप परिवार, वरदान बना

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प्रिया गहरी नींद में सो रही थी तभी उसकी मां उसे चिल्लाते हुए उठाई और कही"चल जल्दी उठ जा बेटा,देखो मैं सभी के झगड़े से तो मैं परेशान हूं ही अब तुम मुझे परेशान मत करो।"तब झट से प्रिया उठकर बोली"अब किस बात पर झगड़ा हो रहा है मां।" तब उसकी मां परेशान होते हुए कही," तुम तो जानती हो हमारे परिवार में हमेशा एक दूसरे के कामों को लेकर ही झगड़ा होता है।आज तुम्हारी दादी और तुम्हारी चाची के बीच झगड़ा हो रहा है।अब चलो उठो और कॉलेज के लिए तैयार हो जाओ।"तब प्रिया अपने परिवार के झगड़े के बारे में सोचते हुए बेड से उठाकर बाथरूम में गई। उसे लग रहा था कि मैं वैसा कया करू की हमारा परिवार सही हो जाए।और सभी में प्रेम का भाव जाग जाए। 

प्रिया फ्रेश होकर नाश्ता के लिए सभी परिवार के साथ बैठी।तभी छोटी चाची की बेटी जिया बोली,"आज का नाश्ता तो बड़ा अच्छा है किसने बनाया आखिर आज का नाश्ता।"वह लग रहा था की झगड़ा का माहौल बनाने वाला था तभी प्रिया बोली ,"जिया जल्दी से नाश्ता करो कॉलेज के लिए लेट हो रहा है। मैं जा रही हु अगर कॉलेज के लिए लेट हो जाएगी तो आज का सिलेबस अधूरा रह जाएगा।"तब जिया उठीवौर दोनो कॉलेज गई। वहा प्रिया कॉलेज में वक्ति के स्वभाव के बारे में पढ़ रही थी।तभी उसके मन में अपने परिवार के बारे में ख्याल आई। जब सर उन्हें पढाकर निकल रहे थे तब प्रिया सर को रोक कर अपने घर की समस्या बताई।तब सर प्रिया को बताए"अगर तुम उन्हें कुछ ऐसे खेल जो एकता से जुड़े हो। उस के माध्यम से तुम उन्हें समझाओगी तो वह शायद समझ जाएं।"तब सर प्रिया के सर पर सहलाते हुए वहां से चले गए। प्रिया भी खुश हो गई। पर वह सोच रही थी कि कौन सा गेम करवाएं। फिर उसके दिमाग में एक गेम आया और वह खुशी-खुशी घर पहुंची। वहां जाकर अपने परिवार को इकट्ठा करवाई। उन्हें वृत्ताकार में खड़ा किया। फिर दादी को बाहर निकाल कर कहा,"दादी आप एक आदमी हैं और जो भी यहां गोलाकार में दिख रहे हैं जो बंदर हैं। अब आप जैसे जैसे करेंगे वैसा ही यह लोग भी करेंगे। तो फिर गेम स्टार्ट करें"सभी चिल्लाते हैं,"हां बेटा स्टार्ट करो"तो इसी तरह गेम शुरू हो जाता है। आदमी कभी मम्मी तो कभी चाची तो कभी ना ना तो कभी बुआ बनती थी और जो जैसे करते थे वैसा ही यह लोग भी करते थे। इसी तरह शाम हो जाती है। तब प्रिया बोली,"अब गेम ओवर करते हैं"गेम ओवर हो जाता है। और सभी लोग एक तरफ बैठ जाते हैं। तब प्रिया उन्हें समझाती है,"अब आप लोग समझ गए अगर हमें एक साथ रहना है तो एक दूसरे की बात माननी चाहिए।"तब लग रहा था कि एक शब्द में ही वह लोग समझ गए। उस समय पता नहीं सबको क्या हुआ कि सभी प्रिया को पकड़ कर रोने लगे। तब लगा कि प्रिया की बात का असर पड़ा है उन लोगों पर। फिर प्रिया उनके आंसू पोंछती है और हंसते हुए बोलती है,"मेरा परिवार वरदान है।"फिर वह खड़े होकर बोलती है,"हम अब कल के विश्व परिवार दिवस मनाएंगे। अब सो जाएं आप लोग नहीं तो रात भर रोते रहे तो हमारा घर महासागर बन जाएगा। और कल विश्व परिवार दिवस मनाएंगे गुड नाइट!"


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