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Bgvs Bihar

Children Stories Children

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चिंतित परिवार

चिंतित परिवार

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1 दिन की बात है। मेरे गांव के बगल में एक लड़की और उसके परिवार रहते थे और वह लड़की पहली बार गांव आए थे फिर उस लड़की से मेरी दोस्ती बन गई और मुझसे अच्छे से बात करती थी। मुझे अपने बारे में बताएं कि मैं पहले शहर में रहती थी फिर जब मेरे पापा की नौकरी नहीं लगी तो मेरे पापा के दोस्त ने मेरे पापा को नौकरी दिलाई और मैं मेरे मम्मी पापा खुशी-खुशी रहने लगे।

एक दिन मेरे पापा को नौकरी से निकाल दिया गया था। तब मैं गांव में रहने आ गई। पर तुम्हारे घर से आवाज क्यों आती है। क्या बताऊं मेरे मम्मी पापा बहुत एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं फिर मेरे पापा यही बोलते हैं। मेरी बेटी को पढ़ाना है मेरे पास नौकरी नहीं है। मैं क्या करूं और मेरे मम्मी पापा मुझसे अच्छे से बात भी नहीं करते। मेरे मम्मी पापा खाना भी नहीं खाते, बस हाथ पर हाथ धरकर बैठे रहते हैं, मेरे घर में ज्यादा खाने का सामान भी नहीं है तुम ही बताओ मैं क्या करूं। मेरे पास एक तरकीब है जिससे तुम्हारा परिवार का चिंता कम हो सकता है। मैं जिस विद्यालय में पढ़ती हूं वह विद्यालय सरकारी विद्यालय है मैं अपने पापा से कह कर तुम्हारा नाम लिखवा सकती हूं। ठीक है मैं अब चलती हूं। कल मिलूंगी।

दोनों अपने अपने घर चल गई। रात होते ही बगल वाले घर से आवाज आने लगी और मैं पापा से बात करने वाली थी पर अचानक आवाज आने लगी तो मैं दौड़ पड़ी और मैं अपने दोस्त के घर पर जाकर देखा तो सब रो रहे थे। मेरे पापा मम्मी भी थे यही बात पूछ रहे थे क्या हुआ आप लोग रो क्यों रहे हैं। अंकल चाहते हैं कि मैं अपने बेटी को पढ़ाऊ। पापा मैं चाहती हूं कि मेरे विद्यालय में अंकल की बेटी यानी मेरी दोस्ती का का नाम लिखवा दिया जाए। मेरे पापा इस बात पर प्रसन्न हो गए और मेरे विद्यालय में शिखा का दाखिला हो गया और शिखा अच्छे से पढने लगी। एक दिन मैंने पूछा किसी का तुम्हारा सपना क्या है, शिखा बोली,"मैं बड़ी होकर वैज्ञानिक बनना चाहती हूं और तुम।"मैं एक डॉक्टर बनना चाहती हूं।"चलो हम लोग विद्यालय चलते हैं लेट हो जाएगा।



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