zindagi जिंदगी...।
zindagi जिंदगी...।
हर पल नये रंगों में ढल जाती है ये जिंदगी,
हजारों ख्वाब पल भर में दिखती है ये जिंदगी,
कभी तो पल भर में पूरे हो जाते हैं सपने,
तो कभी सारी उमर सपनों में कटनी पढ़ती है ये जिंदगी,
बिखरे ख्वाबों सी लगती है जिंदगी,
कभी कही मनाने की कोशिश तो की बहुत
फिर भी मुझसे खफा सी लगती है जिंदगी,
कभी कभी इस जिंदगी में गमों के मेले बहुत देखे,
हंसते पल चार और रोते हुए हज़ार देखे,
जाने क्या था मंजर खुदा को अपना बनकर दर्द देने वाले हजार देखे,
सुख दुख के मेले का नाम है जिंदगी,
कोई चाहे माने या ना माने पाकर भी सब कुछ खोने का नाम है जिंदगी,
पल-पल दर्द के सिवा कुछ नहीं ये जिंदगी,
लम्हे हो खुशियों के तो भी नहीं होता एहसास हमें।
हर लम्हों में दर्द के सिवा कुछ नहीं ये जिंदगी।
आगे बढ़ते रहने का नाम है जिंदगी,
बीते लम्हों को भूलकर नई कहानी बनाने का नाम है जिंदगी।
दुख दर्द तो हज़ार मिलते हैं यहां दुख को भूलकर हंसने का नाम है जिंदगी।
रंग बिरंगे रंगो सी होती है जिंदगी।
अँधेरों में रोशनी की तरह है जिंदगी।
थक के हारने का नाम नहीं
पल-पल आगे बढ़ने का नाम है जिंदगी...!
