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Shreya T

Abstract

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Shreya T

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वो लम्हा

वो लम्हा

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वो पल याद आते हैं जब वो 

लम्हा यूँ बीतता गया ,

आँखें एक दूसरे की आँखों से जा मिली

वो हलकी सी मुस्कुराहट उसके चेहरे पे 

देखने वाले के दिल से जा मिली।


लम्हा यूँ बीतता गया

बातें यूँ हीं चलती रही,

रातें बीत गई 

और मानो सुबह कभी हुई ही नहीं।


इन लम्हो में आज कल के रीमिक्स् नहीं 

पर ९०'s के वोह गाने याद आते हैं

जैसे मनो हमारे लिए ही बने हो।


वोह एहसास अलग सा था

मानो मन में एक हलचल हुई हो। 

लम्हा थम सा गया , मानो बारिश के मौसम् 

में वोह पानी कि बूंदें हमसे कुछ कह रही हो।


यह लम्हा तब होता है जब ,

एक दूसरे के मन में एक दूसरे के लिए

एक मिठास सी हो , पर उसका इकरार न हो।


एक ऐसा लम्हा भी होता है एक लड़की और लड़के के बीच,

जब उन्हें वोह बचपन वाला प्यार होता है! 

नासमझ सा , बचपने जैसा एक ऐसा भी लम्हा होता है!।



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