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Sahil Hindustaani

Romance


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Sahil Hindustaani

Romance


वो जिस जगह...

वो जिस जगह...

1 min 213 1 min 213

वो जिस जगह भी जाती है

वहीं दुनिया मेरी बस जाती है

जब भी उठकर वो जाती है

मेरी साँसें धड़कन ले जाती है

उसका रुख जब भी देखता हूँ

इबादत मेरी पूरी हो जाती है

मिलने जब भी आती है

दिन मेरा बना जाती है

ख़यालों में भी जब आती है

वो रात चाँदनी कर जाती है!


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