Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Kk Khatri

Abstract

3  

Kk Khatri

Abstract

उसकी तलाश

उसकी तलाश

1 min
7


जो अब नहीं है

इस जहां में 

फिर भी यहां-वहां

वो रहता है हर पल

देता है दस्तक दिल पर

यह दस्तक होती है

इतनी नुकीली 

कि -

ना पूछो कुछ भी 

चुभती है नश्तर की तरह

कर देती है -

छ्लनी-छलनी दिल मेरा

लहुलुहान दिल लिए 

तलाश रहा हूं उसको 

मैं इस जहां में 

जो नहीं है इस जहां में! 

   


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract