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Kk Khatri

Abstract

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Kk Khatri

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उसकी तलाश

उसकी तलाश

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जो अब नहीं है

इस जहां में 

फिर भी यहां-वहां

वो रहता है हर पल

देता है दस्तक दिल पर

यह दस्तक होती है

इतनी नुकीली 

कि -

ना पूछो कुछ भी 

चुभती है नश्तर की तरह

कर देती है -

छ्लनी-छलनी दिल मेरा

लहुलुहान दिल लिए 

तलाश रहा हूं उसको 

मैं इस जहां में 

जो नहीं है इस जहां में! 

   


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