Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Ishita Srivastava

Tragedy Inspirational

4.9  

Ishita Srivastava

Tragedy Inspirational

तू कैसे खुद को इंसान कह सकता है

तू कैसे खुद को इंसान कह सकता है

1 min
585


तू आँखों से हैवानियत 

टपकाता है

तू सोच से हमको खिलौना 

सोचता है

कैसी है ये जवानी

जो एक मासूम का शिकार 

कर लेता है

और तू फिर भी खुद को

इंसान कहता है 


धिक्कार है ऐसी मर्दानगी पर 

जो रक्षा नहीं तू नोच खाता है 

शर्म आती है तेरी माँ-बहनों को

तुझ पर

जो घर में शेर और बाहर भेड़िया 

बन जाता है

और तू फिर भी खुद को इंसान

कहता है


पूछती हूँ आज मैं तुझ से  

क्या है तेरी रगों में विष?

कहती हूँ में आज सबको

दफ़ना दूंगी तेरी साज़िशों को

तू आज जितना दर्द दिया है

तुझे उतना ही वाक़िफ़ कराऊँगी 

तूने आज जितने क़त्ल किये है

तुझे ज़िंदा जलाऊँगी

हर उस मासूम की चीखें 

तेरे कानों में गूजेंगी


हर उस मासूम के खून से 

तेरी मौत लिखूंगी

कह रही हूँ आज सबसे

तमाशा देखना बंद करो

बता रही हूँ सरकार को

अब तो इन्साफ करो

दे रही हूँ चेतावनी 

अब तो इनका सर्वनाश करो


कह देती हूँ आज इस दुनिया से

मंदिर में आरती, मस्जिद में नमाज़ 

अब खुश ना होंगे अल्लाह और

भगवान 

गुस्से में है आज धरती माँ भी 

उन्ही की गोद में चीख रही है

आज हर बेटी भी

अब अगर कुछ ना किया तो 

खुद करेंगे इन्साफ भी 


ज़रूरत पड़ी तो साथ में करेंगे

विनाश भी

फिर मत सीखाना अपना कानून

तब बनाएँगे खुद की राह भी

कमज़ोर नहीं जो सह लूँ

तेरे वहशी पने के अत्याचार को 

तेरे ही खून से लिखूंगी 

तेरी दरिंदगी की दास्तान को ..



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy