STORYMIRROR

Eisha Gohil

Abstract

3  

Eisha Gohil

Abstract

तलाश

तलाश

1 min
198

मालूम नहीं है हुआ क्या है 

दुआ में दुआ क्या है,

मोहब्बत से महरूम इस जिंदगी में,

जीने की वजह क्या है


आसमान रुका सा है

चाँद को समेटे हुए 

उसको पूछो इस अंधेरे में 

रोशनी का अक्स कहाँ है 


कुछ दोस्तों के यकीन पर 

फिर उठ खड़ा हूं रात में 

ढूंढ रहा हूं उस शख्स के 

दिल में गिला क्या है 


मुझे साजिशों ने नहीं तोड़ा,

इतना उनमें कहाँ दम था,

बस जीने की वजह में अब,

साँसों का ज़िक्र कहाँ है.....


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Eisha Gohil

Similar hindi poem from Abstract