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sudheer bollapragada

Abstract

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sudheer bollapragada

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तेरी यादें

तेरी यादें

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भुला देने की कोशिश करता,

फिर से ताज़ा हो जाती तेरी यादें


रोज़ पल पल मरता कभी तो

फना होने का मौका मिले


उफ्फ ये दर्द भी कमाल का है

तेरी यादों का मौत भी मीठी देता है।


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