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Prashant Beybaar

Abstract Inspirational

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Prashant Beybaar

Abstract Inspirational

सुनी है किसने वो रातों की सरगोशी

सुनी है किसने वो रातों की सरगोशी

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सुनी है किसने वो रातों की सरगोशी

वो तारों की झिलमिल किसने सुनी है


न है कहीं जन्नत, न है नरक का रस्ता

जो है वो यहाँ है; हाँ यहीं है, यहीं है।


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