STORYMIRROR

Poonam Bhargava

Abstract

3  

Poonam Bhargava

Abstract

समाधान

समाधान

1 min
238


नदी उदास थी

कहना चाहती थी कुछ

पथिक से

जो थक कर बैठ गया था

उसके किनारे

और अँजुरी में भरा जल

हिक़ारत से देख रहा था

नदी ने दुःख से

मूँद ली आँखें

नहीं होना चाहती वो....

अभिशप्त

रेत के नीचे दब कर


कोर से बह निकले

उससे पहले ही

पी गई आँसुओं को


आँसू पीना

स्वम् को तरल बनाए रखने का

हमारे दिए गरल से बचने का

एकमात्र समाधान बचा है

उसके पास


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Poonam Bhargava

Similar hindi poem from Abstract