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Shamim Shaikh

Inspirational

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Shamim Shaikh

Inspirational

शहीद

शहीद

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स्वतंत्रता संघर्ष में 

वो लोग जो 

हुए थे शहीद

अगर देखते होंगे 

आज इस दुनिया को 

तारों की आँखों से

या फिर

जिस मिट्टी में वो मिल गये

उसमें खिले हुए

फूलों की आँखों से

तो सोचते होंगे

"वतन के लिए हमने बेझिझक जान गँवा दी

नहीं सोचा कभी

आज़ाद होने के बाद भी

नहीं मिलेगी आज़ादी !


घर का आँगन अपने लिए

 बचपन से बेगाना था

गुलामी का ज़हर हम पीते थे

कसमें हमारा खाना था

एक ही लक्ष्य जीवन का था

जेलों में ठौर-ठिकाना था

एक जुनून था एक जोश था

धधकती ज्वाला थी हमारे दिल में

और एक आक्रोश था !


जोश में मदहोश होकर

गोली की होली खेली थी

ले-दे कर अंग्रेज़ो से

आज़ादी हमने ले ली थी !

हमने सोचा था

आज़ादी के बाद

कोई नहीं भूखा रहेगा

कहीं नहीं सूखा पड़ेगा 

दूर क्षितिज तक

जीवन उड़ान भरेगा !


आज हम देखते हैं

बड़े बड़े शहरों में बसते

हज़ारों लोग रस्तों पर

आज़ादी के बाद भी 

आया नहीं कोई अंतर !

गम नहीं इस बात का

वतन के लिए

बदन से हमारे

रंग न लाने वाला खून बहा

पर बहुत दर्द हुआ था जब 

खुले-आम हमारे ख्वाबों का खून हुआ !


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