सच की राह
सच की राह
आंसू न बहें, न रोना तुम,
जीवन में धैर्य न खोना तुम।
हर दिन कुछ सपने संजोना तुम
दिल की माटी में बोना तुम।
हर पल है अनमोल, धरा पर है
इसको व्यर्थ न खोना तुम।
कठिनाई आएं राहों में,
न विचलित उनसे होना तुम।
कुछ दुख के बादल आएंगे
जो क्षणिक अंधेरा लाएंगे
उनसे किंचित न घबराना
संयम को ढ़ाल बनाना तुम।
आशाओं के दीप जलाकर के
हर पग विश्वास के भरना तुम,
धता बता उस अंधकार को,
राहों को रौशन करना तुम।
नव पल्लव पर्णो की आभा सी
तन मन में उमंगित करना तुम,
कठिन परिश्रम के हर पथ को,
पग पग का आधार बनाना तुम।
उस उज्ज्वल भोर के अनुभव से,
कर्मों का मान बढ़ाना तुम,
परचम फहराकर ,मंज़िल पर,
जीवन को सफल बनाना तुम।।
माँ पापा का नाम बढ़ाना तुम
सच की राह पर चलना तुम।
