STORYMIRROR

Abhishek Chouksey

Inspirational

3  

Abhishek Chouksey

Inspirational

सब कुछ कहा नहीं जाता

सब कुछ कहा नहीं जाता

1 min
327

रोज़ निकल पड़ता हूं घर से

ख़ुशियों की तलाश में

देख घोर अंधेरा भर

नहीं घबराता मैं

थक जाता हूँ

पर रुकना नहीं चाहता मैं


पैसों के इस खेल में

छूट जाते है कई कहे

अनकहे अपने पीछे

फिर भी रोज़ निकल पड़ता हूँ मैं


बुलंद इरादा कर के

की एक दिन होगी ये

सारी दुनिया मेरे कदमों में

हर रोज़ एक कदम बढ़ता हूँ

अपनी कामियाबी के पीछे


जहाँ रुका वह दोस्त बन गए

जब चला तो नक़ाब उतर गए

चलते चलते आ चूका हूँ मैं

ख़ुशियों के इस समुन्दर में

जो साथ है वो भी मेरे अपने है

और जो बदल गये वो भी मेरे अपने थे



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational