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Anamika Armo

Inspirational

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Anamika Armo

Inspirational

*** सैनिक की दुनिया ***

*** सैनिक की दुनिया ***

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  मैं छोड़ आया---

  वो मौज भरी दोस्ती, गलियों को, 

  चुन लिया मैंने,देशभक्ति की राह ।

  लोग सोचते हैं- - -


 जो सोचा मैंने, कर दिखाया ,

 कितनी खुशी थी, मेरे मन में ,

 मैंने जो चाहा, वो मुकाम ,है पाया ।

 सैनिक बन, सीमा का, सजग प्रहरी हूँ- - -


 ऊँची पर्वतीय क्षेत्र और बहती हिम सर्द सेवायें,

 कुछ पलों के लिए, घर की याद है आती,

पर, देशभक्ति में, मैं सब कुछ भूल जाता हूँ ।

सबकी तरह, मेरी भी शादी हुई- - -


वो पल, मेरे लिए ,कितना खुशनुमा था ,

और घर-परिवार, रिश्तेदारों, गाँव में बड़ी धूम मची ।

लगता था कि, इन्हीं मस्ती में, खो जाऊँ- - -


पर, छुट्टियाँ हो रही थी समाप्त ,

पर, छोड़ना पड़ा था, मजबूरन उस घरोंदा को ,

जीवन-साथी-नववधू का प्रेमिल साथ, 

बिछुड़ने का था, गमगीन- सा मंज़र ।


मैंने कसम खाई थी---

अपने आप से, कि मैं एक सच्चा देशभक्त बनकर, 

जीऊँगा भी देश के लिए, और मरूँगा भी देश के लिए, 

मेरा जज़्बा, सारी बातों को भूल ,

कैसे मैं, एक बेहतर देशभक्त कहलाऊँ ।


अचानक सीमा में युद्ध का शंखनाद हुआ- - -

मैं खुशनसीब, उसका एक हिस्सा बना ,

उस पल,मेजर,कैप्टेन के हुक्म का पालन, 

मैं पूरी ताकत, पूरे जोश के साथ, 

अंतिम श्वाँस तक लड़ता रहा ।


पर,मैं अपने फर्ज को, अधूरा छोड़- - -

देशभक्ति के नाम, कुरबाँ है, मेरी जान, 

तिरंगा में, लपेटा मेरा मृत शरीर ,

मेरे कर्त्तव्य की ,थी ,अंतिम निशानी ,

दे मुझे श्रद्धांजलि, करते सब नमन ।


थी,मेरी, ये कैसी अश्रुपूरित बिधाई- - -

परिवार, पत्नी में, कैसा मातम है पसरा ,

पर ,थी भीतर छिपी एक स्वाभिमानी एहसास, 

मां ने अपना बेटा खोया,पत्नी का सुहाग है उजड़ा, 


पर ,भीतर ही भीतर, था बड़ा गुमान ,

अब मुझे विधवा, शहीद की पत्नी नया रूप मिला ।

ये थी, मेरे जीवन की गौरव गाथा---

आज भी, उनकी साहसिक शहादत को, 

याद कर, हो जाते, हमारे सजल नयन ।


मरणोपरांत राष्ट्र ने किया, उनको सम्मानित- - -

पुलकित व्यथित मन से, सारा परिवार, 

इसलिए अक्सर कहा जाता है कि ,

वीर शहीद ,कभी भी, मरा नहीं करते, 

वो रहते सदा ही इतिहास के पन्नों में, 

और वो रहते हैं, हमेशा अजर-अमर ,

हम सबका, उन सभी वीर शहीदों को, 

विनम्र श्रद्धांजलि और शत् -शत् नमन ।




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